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Amlendu Shukla

Abstract


3.3  

Amlendu Shukla

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आशाएं

आशाएं

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सपने पूरे होगे सब,अंतर्मन मेरा कहता है।

आशाओं की दुनिया में, एक सितारा जलता है।

तूफानों ने जब भी घेरा,काली रातों ने हमें डँसा।

दिनकर आएगा कल ही,ध्रुव तारा ऐसा कहता है।

सपने पूरे होंगे सब,अंतर्मन मेरा कहता है।


जैसे जैसे हम टूटे हैं,वैसे वैसे जुड़ जाएंगे।

आशीष हमें ईश्वर देगा,कश्ती हम पार लगायेंगे।

धारायें प्रलयंकारी हों या स्वयम प्रलय ही आ जाये।

प्रतिकूल परिस्थिति चाहे जितनी,उस पार पहुंच हम जाएंगे।

जैसे जैसे हम टूटे हैं,वैसे वैसे जुड़ जायेंगे।


टूटे हिम्मत कभी नहीं, आशीष प्रभु हमको देना।

कितनी भी कठिन परीक्षा हो,उत्तीर्ण हमें तुम कर देना।

हमको न डरना दुःखों से है,यह आता जाता रहता है।

सपने पूरे होंगे सब,अंतर्मन मेरा कहता है।


बुझ न जाये आस का दीपक,तेल हमें भरना होगा।

सपने न खो जाए कहीं, इसलिये हमें जीना होगा।

मिलेगा पौरुष से ही सब,स्वयं विधाता कहता है।

सपने सब पूरे होंगे,अंतर्मन मेरा कहता है।।


      


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