आपकी नज़्में
आपकी नज़्में
आपकी नज़्मों से दिल बाग़ बाग़ है,
मिलें न मिलें ,साथ रहें न रहें
इन नज़्मों के मुश्क से
ये जहां गुलिस्ताँ हैं।
आपकी नज़्मों से दिल बाग़ बाग़ है,
मिलें न मिलें ,साथ रहें न रहें
इन नज़्मों के मुश्क से
ये जहां गुलिस्ताँ हैं।