STORYMIRROR

GOVIND RAKESH

Tragedy

2  

GOVIND RAKESH

Tragedy

आँसुओं में डुबो गया

आँसुओं में डुबो गया

1 min
165

आँसुओं  में  डुबो गया जैसे

तीर ख़ुद को चुभो गया जैसे।


भागने लग गये सभी देखो

आज क़त्ले आम हो गया जैसे।


भीड़ भी कम अभी इधर दिखती

आज ये शह्र खो गया जैसे।


हाक़िमो की ख़ता बता डाली

अब ये अखबार तो गया जैसे।


झूठ राकेश  ने कहा ही क्यों

लाज  इस बार धो गया जैसै।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy