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GOVIND RAKESH

Others

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GOVIND RAKESH

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रहने लगे क्यों ख़यालात में

रहने लगे क्यों ख़यालात में

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आप रहने लगे क्यों ख़यालात में

नींद आती नहीं आज कल रात में


मैं नहीं हाल अपना सुना भी सका

वक़्त तो महज़ गुज़रा मुलाक़ात में


छत टपकती रही आँसुओं की तरह

आग तो अब लगे ऐसी बरसात में


कल मिले गर इसी मोड़ पर आप तो

कह मैं दूँगा सभी बात ही बात में


है फ़िज़ा में अभी जहर ही तो भरा

हो न सकता जुदा ऐसे हालात में



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