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GOVIND RAKESH

Abstract

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GOVIND RAKESH

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आज कल बीमार हम हैं

आज कल बीमार हम हैं

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आज कल बीमार हम हैं

हो गयेे  लाचार  हम हैं


क्या हुआ जो हम उधर थे

आज तो इस पार हम हैं


कल वहीं फिर से मिलेंगे

मौसमी  किरदार हम हैं


तुम ने पूछा भी न हमको

लगता है  बेकार हम हैं


पीछे मेरे ही चलो  तुम

आज तो सरदार हम हैं।


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