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Gulab Jain

Drama

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Gulab Jain

Drama

आँखों की नमी

आँखों की नमी

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हर सू कुछ ऐसी चली अजनबी हवा |

छोड़ा साथ साये ने वो भी मेरा ना हुआ।


दुनिया का दिया ज़हर हर पल पी रहा हूँ,

लगता नहीं अब असर करेगी कोई दवा।


तुम से बिछड़ के आईना देखा जो एक दिन,

ऐसा लगा किसी ग़ैर से सामना हुआ।


तेरी गली से आ कर छू कर मुझे गई,

कम्बख़्त भूलने नहीं देती तुम्हें, हवा।


खुलने न दिया राज़ मेरे होठों ने दर्द का,

मगर आँखों की नमी ने सब बता दिया।।


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