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Amit Kumar

Romance


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Amit Kumar

Romance


आँखों के लब

आँखों के लब

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कुछ उभर आया है 

दिल के ज़ख्मों का रंग 

यह अलग बात है 

तेरे लिए स्याह है 

मेरे लिए खून-ए-जिगर 


आह जो भरते है 

यह मख़मली अल्फाज़ 

ख़ामोश कर जाते है 

तेरी आँखों के लब

      


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