आलता लगे रत्नारे पैर
आलता लगे रत्नारे पैर
फागुन की आहट आने को है
लगता है मेरे सजन आने को है!
अबके ये प्रेम के रँग ना छूटने के है
वैसे भी पिया कहाँ अब रूठने के है,
खिले गाल पर टेसू के रंगीले फूल
जैसे हँसी के गुब्बारे बस फूटने को है !
फागुन की आहट आने को है
लगता है मेरे सजन आने को है!
अंग अंग मधुमास समाए
फागुन में जिया फिर बौराए,
गोरी के नयनों में सिमट गया
रंगीले रंगों का संसार समाए!
फागुन की आहट आने को है
लगता है मेरे साजन आने को है!
अँखियों से मारे प्रेम की पिचकारी
गोरी बार बार देखने जाए अटारी,
देवर ननदिया करें हँसी ठिठोली
खोई खोई सी रहती है हमज़ोली !
फागुन की आहट आने को है
लगता है मेरे साजन आने को है !
रँग ग़ुलाल सब धरे पड़े है
हृदय में भावनाएँ उमड़े है,
दृग उलझें टूटे से पलाश है
रंगों के जैसे पतंगे उड़े है!
फागुन की आहट आने को है
लगता है मेरे साजन आने को है !
अब फागुन दहक सा रहा है
मन में महुआ महक सा रहा है,
अंतर्मन से तिमिर हटा अब
ह्रदय प्रेम से लहक रहा है !
फागुन की आहट आने को है
लगता है मेरे सजन आने को है !
साजन से मिलने को हुई तैयार
सजनी कर के यूँ सोलह श्रृंगार,
आलता सजे पैरों से थिरकन लागी
प्रिय प्रेम में खोई अलबेली नार !
फागुन की आहट आने को है
लगता है मेरे साजन आने को है !
यौवन से भूषित देह ग़दराई
आमियाँ महकने लगी अमराई,
सजनी पिय को मन में उलाहे
बैरी सजनवां मोहे क्यूँ बिसराए !
फागुन की आहट आने को है
लगता है मेरे सजन आने को है !
राधा रानी प्रेम में पगकर
लाज से दोहरी होती जाए,
प्रीत की लगन लागी जिया में
पगली राधा को सिर्फ सांवरा भाए !
फागुन की आहट आने को है
लगता है मेरे सजन आने को है !

