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Praveen Gola

Tragedy


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Praveen Gola

Tragedy


आखिरी कागज

आखिरी कागज

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फिर से नम आँखें ,दो रोटी की मोहताज ,

एक हाथ में कलम ,दूजे हाथ में कई राज़।

ये आखिरी कागज जो ,अधूरा था बिन हस्ताक्षर ,

आज उस पर भी ,सजेंगे कई अक्षर।

ना जाने अब तक कितने कागज ,कर दिये मोह के हवाले ,

वो फिर भी असंतुष्ट खड़ा ,माँगे मुझसे मुँह के निवाले।

पास में बैठी जीवनसंगीनी ,हाथ जोड़े गिड़गिड़ा रही थी ,

अपने पेट के जाये से ,अपनी लाज बचा रही थी।

मगर वो पापी और अधर्मी ,खड़ा मुस्कुरा रहा था ,

माया जाल से भ्रमित हो ,मखौल उड़ा रहा था।

दिल पर पत्थर रख ,उस काँपते हाथ ने ,

कर दिये हस्ताक्षर ,उस आखिरी कागज पर।

आज लाचार थे वो माता - पिता ,जिन्होने उसे पालपोस कर बड़ा किया ,

अपनी आखिरी सम्पत्ति को भी ,हँसते - हँसते उसे समर्पित किया।


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