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Vivek Madhukar

Tragedy

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Vivek Madhukar

Tragedy

आज का नेता

आज का नेता

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आज का नेता

समाज की

नाक का फोड़ा,जो

दिनो-दिन बनता जा रहा नासूर है .


आज का नेता

देश के

माथे पर उगा कैक्टस

जिसके काँटे

बींध-बींध कर

देश का भाग्य

कर रहे लहू-लुहान हैं


आज का नेता

एक ऐसा मदारी

जिसने बनाया है

भोली-भाली जनता को

अपना जमूरा

एक ओर तो रख रहा

खुश उसे नचा-नचा कर

दूसरी ओर

भर रहा उसके ही श्रम-संचित

धन से अपनी तिजोरी है


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