आज का नेता
आज का नेता
आज का नेता
समाज की
नाक का फोड़ा,जो
दिनो-दिन बनता जा रहा नासूर है। .
आज का नेता
देश के
माथे पर उगा कैक्टस
जिसके काँटे
बींध-बींध कर
देश का भाग्य
कर रहे लहू-लुहान हैं ।
आज का नेता
एक ऐसा मदारी
जिसने बनाया है
भोली-भाली जनता को
अपना जमूरा
एक ओर तो रख रहा
खुश उसे नचा-नचा कर
दूसरी ओर
भर रहा उसके ही श्रम-संचित
धन से अपनी तिजोरी है।
