आईना
आईना
तुझे छू लेने की चाहत होती है
अपनी गीली आंखों से तुझे जी भर
के देखने की आरजू मन में उठती है।
दिल की सारी बातें कह लेने की,
तेरी शिकायतें तुझसे ही लग गले,
सुनाने के अरमां तो जगते हैं।
परेशान करती हैं जब तेरी यादें
तो कसके तुझे बाहों में भर लेने,
की चाहत तो होती है।
तेरा क्यूटी कहके चिढाने की,
छेड़ने पर मेरा मुंह बनाने की,
आदत तो होती है।
तेरा हर राज अपने सीने में दफन
करके,मैं तेरा आईना हूं,तू मुझसे
सब कुछ कह सकता है यह जताने
की चाह तो होती है।
तेरा सर अपनी गोद में रख,तेरे बालों
में उंगलियां फिराने का,तेरे माथे पर
अपनी लबों की छुअन का एहसास,
देने की हूक तो उठती।
तुझसे बिछड़ कर भी तेरे ही सपने
बुनने का और उनको हकीकत कर
देने का हक तो खुद को देती हूं।

