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Ambuj Pandey

Drama


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Ambuj Pandey

Drama


आईना

आईना

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आज एक शख़्स मिला मुझे,

कुछ उदास-सा था,

पीर थी कोई उसे,

दर्द कोई खास सा था।


बोझ रिश्तों का,

जिम्मेदारियों की पीठ पर लिए,

हँसी होंठों पे थी,

अंदर से वो हताश-सा था।


जैसे वो आज,

माफी माँगने ही आया हो,

जैसे उसे अपनी,

गलतियों का एहसास-सा था।


था कई बार दुखाया,

मैंने दिल उसका,

जब किसी और को,

खुश करने का प्रयास-सा था।


बड़ी देर हो गयी थी,

जब समझ आया,

असली चेहरों पे एक,

झूठा लिबास-सा था।


आज सोचा के चलो,

उससे भी हम मिल ही लें,

अंदर ही अंदर ज़िंदा,

जो एक लाश-सा था।


समान दूरियों पे हम थे,

खड़े उस बेजान जान से,

मैं जितनी दूर आईने से,

वो उतने पास-सा था।


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