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Vijay Kumar parashar "साखी"

Tragedy Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Tragedy Inspirational

"आदत,कमियां देखने की"

"आदत,कमियां देखने की"

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जिसको आदत लगी दूसरों में कमियां देखने की

उसको,कैसे दिखेगी रोशनियां दीयों के जलने की


जिनको आदत है,दिखावे के ऐनक पहनने की

उनको कैसे दिखेगी हक़ीक़त,अपने सामने की


जो तोड़ चुके है,तस्वीरें,अपने भीतर आईने की

उन्हें आदत नही है,उजाले में उजाला देखने की


जिसने कमियां देखी,खुद को छोड़ जमाने की

वो ही बाते कर रहे,आजकल सोलह आने की


जिसदिन देखोगे,स्व कमियां,खुद की नजरों से

छोड़ दोगे,आदत दूसरों में कमियां खोजने की


पर जिन्हें आदत है,खुद की कमियां देखने की

वो लोग कभी न खोज करते है,पराये गहने की


जिसको आदत नही है,झूठ,छल,कपट सहने की

वो ही कोशिश करते है,यहां पर सत्य समझने की


जो देखते अपनी कमियां,ख़ुद में लख आईने की

उन्हें आदत लग जाती,सबमें अच्छाइयां देखने की


दरिया चाहे बड़ा हो,प्यास न बुझाता,एकपल की

नदियां चाहे छोटी हो,प्यास बुझा देती,महीने की


जिनकी होती है,आदत दलदल से दूर रहने की

उनकी न होती आदत,कीचड़ में पत्थर फेंकने की


जिनकी होती है,आदत सबसे अच्छाई लेने की

वो कोयले में खोज कर लेते है,कोहिनूर हीरे की।



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