corona warriors
corona warriors
हादी बेटा अभी तक तैयार नहीं हुए तुम पता तो है आज हम सब को लाल किले जाना है वहाँ आयोजित कार्यक्रम में। हादी की अम्मी ने उसके कमरे में घुसते हुए कहा ।
हादी जो की उदास बैठा था हाथ में एक तस्वीर लिए ।
"बेटा क्या हुआ इतने उदास और गुमसुम क्यूं बैठे हो और ये क्या अभी तक तैयार भी नहीं हुए तुम तो अपने बच्चों से भी कही ज्यादा मुझे थका रहे हो तैयार होने में।" हादी की अम्मी अस्मा ने कहा
हादी उन्हें देख उनके गले लग कर रोने लगा और बोला " अम्मी आपने खुद को इतना मजबूत कैसे बनाया है मुझे भी बता दीजिये। मैं तो समय के साथ साथ और कमज़ोर होता जा रहा हूँ जब जब अपने दोनों बच्चों को बिन माँ के देखता हूँ तो उनसे नज़रें नहीं मिला पाता हूँ।
अम्मी एक साल हो गया हुदा को इस दुनिया से गए हुए लेकिन आज भी मैं उसकी मौत के गम को भुला नहीं पाया हूँ, आखिर क्यूं उसने अपनी जान की परवाह किए बिना अपने फर्ज़ को अंजाम देती रही आखिर क्यूं वो उस महामारी से जूझ रहे लोगो का इलाज करती रही , क्या उसे मेरी और मेरे बच्चों की कोई परवाह नहीं थी क्यूं उसने अपने डॉक्टर के फर्ज़ को अंजाम देने के लिए अपनी सारी खुशियाँ कुर्बान कर दी और आखिर कार खुद भी उस महामारी की चपेट में आ गयी।"
अस्मा ने उसके आंसू अपने दुपट्टे से साफ किए और बोली " बेटा तुम्हें तो गर्व होना चाहिए अपनी बीवी पर जिसने अपने फर्ज़ को तर्ज़ी दी ना की अपने परिवार वालो को और लगी रही हर दम मरीज़ों को बचाने में। सब जानते थे की इस महामारी का कोई इलाज नहीं था लेकिन फिर भी डॉक्टर हर दम उनके साथ खड़े रहे और उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश करते रहे।
बेटा इस महामारी ने सिर्फ हम से हमारी हुदा ही नहीं छीनी ना जाने कितने बच्चों के सरो से उनके बाप का साया छीन लिया जा उस भयंकर महामारी में भी एक योद्धा की तरह अपने घर वालों का पेट भरने के लिए उन्हें भूख से बचाने के लिए घरों से निकले और खुद उस बीमारी की चपेट में आ गए , ना जाने कितनी मांओं से उनके जवान जहान बेटे तो ना जाने कितनी सुहागनों का सुहाग इस मुये कोरोना ने छीन लिया।
बेटा मुझे अपनी बहु पर फ़क्र है जो की अपने फर्ज़ को अंजाम देते देते शहीद हो गयी वो खुद तो शहीद हो गयी लेकिन आज उसकी और उसकी टीम की वजह से ना जाने कितनों के घरों के चिराग दोबारा रोशन हो पाए ।
बेटा तुम भी इस तरह उसकी मौत का सदमा ना करो नहीं तो उसकी रूह बेचैन रहेगी हम सब को मिलकर हिम्मत से इस मुश्किल घड़ी से निकलना है । अब तुम ही अपने उन दोनों बच्चों रूही और रोहान के अम्मी अब्बू हो इसलिए हिम्मत से काम लो।
हुदा बेचारी ऐसा इस घर से काम पर गयी सफ़ेद कोर्ट पहन कर कौन जानता था की तीन महीने बाद वो सफ़ेद कफ़न में लिपटी आएगी और वो ऐसी बदनसीब की उसे हम देख भी नहीं सके उसके सीने पर सर रख कर रो भी नहीं सके ।
वो बेचारी अपने छोटे छोटे बच्चों को देखे बिना ही इस दुनिया से चली गयी जो भी थोड़ा बहुत उसने देखा वो भी वीडियो कालिंग पर वो भी काम के दौरान उसका कितना मन था अपने बच्चों को सीने से लगा कर प्यार करने का लेकिन इस महामारी ने उसे अपने बच्चों से मिलने तक नहीं दिया। वो ऐसा इस घर से आखिरी बार निकली एक फौजी की तरह और फिर शहीद हो कर वापस आयी अपने फर्ज़ को अंजाम देकर बेचारी भरी जवानी में ही इस फानी दुनिया को अलविदा कह गयी ।
मुझे फ़क्र है आज अपनी बहु पर की वो ऐसा काम कर गयी की उसे मरने के बाद भी दुनिया याद रखेगी सिर्फ उसे ही नही जो जो उस महामारी में हमारी रक्षा कर रहे थे और शहीद हो गए फिर चाहे वो नर्स हो, वार्ड बॉय हो, डॉक्टर हो, पुलिस वाले हो, महिला पुलिस कर्मी हो जो अपने बच्चों को घर पर छोड़ कर हमारी रक्षा कर रही थी ।
जब भी कभी दास्तां -ए -कोरोना सुनाई जाएगी तब इन शहीदों का नाम अदब से लिया जाएगा ना की उन लोगों में शामिल किया जाएगा जिन्होंने इस संकट की घड़ी में भी सिर्फ अपनी जेबे भरी जबकी मौत सर पर खड़ी थी उसके बावजूद भी उन्होंने गरीब लोगों को ठगना नहीं छोड़ा कभी दवाएं महंगी देकर तो कभी ऑक्सीजन सिलेंडर ब्लैक में बेच कर तो कभी राशन के दाम चौगुने करके ।
बेटा हादी तुम सब्र करो देखो आज हमारी हुदा और उसके साथ साथ जो लोग भी अपने फर्ज़ को अंजाम देते हुए शहीद हो गए थे उस बीमारी से ग्रस्त हो कर आज उन्हें corona warriors सम्मान से आयोजित किया जाएगा। देखना उस पुरस्कार को मैं उसके बच्चों को दिखाऊंगी ताकि वो जान सके की उनकी माँ कितनी बहादुर थी जिसे मरने के बाद भी याद किया जाता रहेगा । बेटा वहाँ जाकर तुम्हें शायद सब्र आ जाए क्यूंकि वहाँ ना जाने कितनी ऐसी पुलिस कर्मियों की विधवाएं होंगी जिनकी नयी नई शादी हुयी होगी और उनके पति अपने फर्ज़ को अंजाम देते देते उस बीमारी की चपेट में आकर मर गए। ना जाने कितनी माएं होंगी जो अपने बच्चों की शादी के ख्वाब देख रही थी मगर उनके बेटे बेटियां अपना फर्ज़ निभाने में शहीद हो गए उस महामारी में ना जाने कितने मासूम बच्चे होंगे जिनके माँ बाप दोनों ही अपना फर्ज़ अंजाम देने में शहीद हो गए और वो अनाथ हो गए ।
हादी को अपनी माँ की बाते समझ आ गयी और उसने अपने आंसू साफ किए और हाथ में पकड़ी अपनी बीवी की तस्वीर को चूम कर बोला " मेरी बहादुर बीवी मैं अब नहीं रोऊँगा लेकिन तुम्हारी याद मुझे हर दम आती रहेगी जब जब मैं तुम्हारा वो सफ़ेद कोर्ट अलमारी में लटका देखूँगा जिसे पहन कर तुम खुद को अपने आप से जुदा कर देती थी और लोगों की सेवा में लग जाती थी "
थोड़ी देर बाद हादी और उसकी अम्मी और उसके दोनों बच्चे लाल किले पर आयोजित corona warriors सम्मान समारोह में पहुंच गए। वहाँ हादी ने देखा की कुछ औरतों सफ़ेद साड़ी में खड़ी थी जिनके पति ड्यूटी करते करते कोरोना की चपेट में आ गए थे तो कुछ आदमी अपनी गोद में छोटे छोटे बच्चे उठाये थे जिनकी पत्नियां या तो नर्स थी, या डॉक्टर या फिर महिला पुलिस अधिकारी जो की अब नहीं रही थी इस दुनिया में।
वही कुछ माएँ भी खड़ी थी जिनकी आँखों में देख कर साफ नज़र आ रहा था कि उन्होंने अपने बेटे बेटियों को घर से काम पर विदा तो किया लेकिन उन्हें सफ़ेद pp kit में लिपटा देखा और छू भी नहीं सकी क्यूंकि हालात ही ऐसे थे उस समय ।
उन्हें देख हादी को थोड़ा सब्र आया जैसा उसकी माँ ने कहा था और फिर उसने अपना सीना चौड़ा करके मंच पर जाकर अपनी बीवी के नाम का पुरस्कार लिया और घर आकर उसे उसकी तस्वीर के पास रख दिया और अपने बच्चों को दिखा कर बोला " तुम इस बहादुर माँ के बच्चे हो तुम्हें भी इसके जैसा बहादुर और अपने फर्ज़ के प्रति कर्तव्य निष्ट बनना है "
पीछे खड़ी अस्मा ये सब सुन रही थी उसके चेहरे पर हलकी सी मुस्कान थी ।
