STORYMIRROR

Arun Gode

Romance

4  

Arun Gode

Romance

पेंच

पेंच

5 mins
234


      एक परिवार में एक भाई और एक बहन थे. दोनों में ज्यादा अंतर नहीं था. वे अपने माता-पिता के साथ एक छोटे से शहर में रहते थे. अमर और रचना कि शालांत और बारवी तक की शिक्षा शहर के नामी स्कूल में हुई थी. दोनों सहेलींयां, रचना और अलका कन्या विद्यालय में पढती थी. अलका अकसर रचना से मिलने उसके घर आया करती थी. अमर, रचना और अलका में कॉफी घनिष्ठ संबंध होने से ,वे अकसर साथ में बैठकर कोई खेल खेला करते थे. दोनों पढने में तेज थी. अलका का घरेलु वातावरण डाकटरी पेशेवाला था. उसके पिता भी आर.एम.पी डॉकटर थे. उसकी बडी बहन और भाई भी मेडिकल को जा चुके थे. अमर का बारावी का परिणाम बहुत अच्छा नहीं आनेसे वो मेडिकल या इंजिनिअरिंग में नहीं जा सका. इसलिए वो सायंस की स्नातक की पढाई के लिए पास के बडे शहर में रोजाना कॉलेज में आना-जाना करता था. अब अमर और अलका की मुलाखात बहुत कम होती थी. रचना और अलका भी अपने बारवी के इंतिहान की तैयारी में जुट गई थी.

     अमर अपने पढाई में लग चुका था. अमर और अलका की गहरी दोस्ती थी.अलका की तसबिर अमर के दिलों-दिमाग में बैठ चुकी थी. वह अकसर उसके खयाल में डुबा होने के कारन कॉलेज की अन्य लडकियों से ज्यादा मेल-जोल बढाने में रुचि नहीं रखता था. लेकिन अलका जैसी एक लडकी माया, धीरे- धीर उसके करीब आने लगी थी. अलका जैसी होने के कारण अमर भी उससे मेले-जोल बढा रहा था. दोनों में अच्छी दोस्ती बन चुकी थी.लेकिन अमर का दिल कही और अटका हुआ था.

      अलका और रचना ने बारावी में अच्छे अंक प्राप्त किये थे. दोनों को उम्मीद थी कि उनका नंबर शायद अंत में मेडिकल को लग सकता है. अलका को लगा की वो अपने भाई-बहन की तरह डॉकटर बन सकती है. लेकिन रचना भी सायंस पढना चाहती थी.लेकिन अपने भाई की आने-जाने में जो हालत खराब हो रही थी.पढाई पर जो बुरा परिणाम देखकर उसने स्थानीय कला कॉलेज में ही पढाई करने का निश्चय किया था. लेकिन अलका अपना नंबर लगने के उम्मीद में बैठी थी. उसका पहिले और दुसर राऊंड के बाद भी नंबर नहीं लगने पर, निराश होकर अमर के कॉलेज में जीवशास्त्र शाखा में दाखला लिया था.

    अब अमर की कॉलेज में करिबी दो सहेलियाँ हो गई थी. उन तीनों की अक्सर कॉलेज में बाते होती थी. दोनों में उन्नीस –बीस काही अंतर था. दोनों को ही जल्दी समझ में आया की वे दोनों अमर से प्यार करती है. अब पह्ले जैसा, एक तरफा हालात अलका और माया के लिए नहीं थे. दोनों अपने तरह् से अपना प्रेम व्यक्त कर रही थी. लेकिन अमर दोनों का सम्मान किया करता था. अभी वह इस मायाजाल में फसना नहीं चाहता था.वह अपना कॅरिअर बनाने पर ध्यान दे रहा था. अलका और माया भी संयम रख रही थी. इन सब में एकाडेमिक वर्ष खत्म हो गया था.परिक्षा नजदिक आ गई थी. तीनों परिक्षा के तैयारी में जुट गये थे. अमर और माया अभी अंतिम वर्ष में पास होकर चले गये थे.

   प्रथम वर्ष में अलका ने अच्छे अंक हासिल किये थे. उसके आधार पर उसने फिर मेडिकल के लिए प्रयास किया. उसका प्रथम व व्दितीय राऊंड में नंबर नहीं लगा था. अभी कोई उम्मीद नही बची थी. अमर को भी उसका नंबर न लगने के कारण दुःख हो रहा था. लेकिन उसे इस बात खुशि थी की बच्चपन की सहेली अभी भी अपने साथ है.

     अचानक कुछ मेडिकल के छात्रों का केंद्रीय मेडिकल कॉलेज में नंबर लग गया था. इस लिए राज्य के मेडिकल कॉलेज की कुछ सीटे खाली हो गई थी. फिर इस कारण अलका का नंबर मेडिकल को लगा था. वह खुश थी. उसके साथ माया भी खुश थी. उसने सोचा की अमर और अलका का क्षेत्र एकदम ही अलग हो गया है. अभी उनका फिर से मेल होना संभव नहीं है. दो अलग विरुध्द रास्ते कभी नहीं मिला पायेगें. अलका चले जाने से मनोज थोडा उदास लगने लगा था . उसकी उदासी के कारण को माया समझ रही थी. वह अपने तरिके से उसे सुलझाने का प्रयास कर रही थी. दोनों ने सोचा की अभी अंति परिक्षा पास आ गई है. उन्हे प्रॉकटिकल भी पुरे करना है. इसलिए अन्य छात्रों की तरह वे भी अपने कार्य में लग गयें थे. अंतिम परिक्षा देने के कुछ माह बाद उनके परिणाम आयें थे. अमर स्नातकोत्तर की पदवी प्राप्त करने के लिए दुसरे बडे शहर में चला गय था.मायाने स्थानीय कॉलेज में शिक्षा में स्नातक में दाखला लिया था. ना अमर, ना मायाने ने अपनी-अपनी दिल की बात एक-दुसरे से कभी कही थी. माया ने सोचा शायद वह अभी भी अलका इंतजार कर रहा है. अलका ने सोचा की अमर अभी शायद माया के मायाजाल में फस गया है. इसलिए मुझे याद नहीं करता है.


    उधर अमर ये सोचने लगा की अलका मेडिकल को जाने से उन दोनों का रास्ता अलग हो गया है. हम दोनों की दुनिया ही बदल चुकी है. अब उसके बारे में सोचना ही गलत है. शायद अपने पहिले प्यार से खता होकर माया से अपने प्यार का इजहार नहीं कर सका.अमर अपना करिअर बनाने में लग गया था.स्पर्धा परिक्षाओं की तैयारीयों में जुट गया था. किसी दोस्त ने उसे बतायां की उनकी वर्गमित्र माया की शादी तय हो गई है. इस बात से वह बहुत आहत हुआ था. लेकिन इस बात के लिए खुदको ही दोषी मान रहा था क्योंकि उसने तो कई बार अपने तरफ से हात आगे बढायां था. लेकिन मै ही बुजदिल था. जिस में उसका हाथ थामने का साहस नहीं किया. बिना मेरे साहस के वो कैसे आगे बढकर मेरा इंतजार कर सक्ती है?. उसी दौरान अमर को एकखुश –खबरी मिली कि उसका चयन केंद्रीय कार्यालय बरोडा में हो गया है.इस खुशी ने माया का गम कुछ कम कर दिया. नये आशा के साथ उसने नौकरी करना आरंभ कर दिया था. लडका घर से बहुत दूर है इसलिए मात-पिताने एक अच्छी लिखी-पढी लडकी का रिश्ता आनेपर उसकी नई जिंदगी बसा दी थी.


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Romance