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टपरी की यादें (भाग 3)
टपरी की यादें (भाग 3)
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© Indraj Pushpa

Romance

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रेहाना और रोहन एक दूसरे की तरफ देखते हुए मंद मंद मुस्करा रहे थे शायद दोनों ही सोच रहे होंगे कि वो क्या बोले। वैसे सच भी है कि शुरुआत ही तो सबसे यादगार होती है, सबसे पहले कौन क्या बोलता है उसी पर तो सारी उम्र दोनों एक दूसरे को चिढ़ाते है और अपने करिबियों को बताते है कि किसने उस वक्त क्या कहा तथा किसने पहले अपने प्यार का इज़हार किया।

इसी बीच खाने की आदत से मजबूर रोहन ने सोचा कि ये तो कुछ बोलने से रही क्यों ना मैं ही बातें प्रारंभ करूं। उसने रेहाना कि तरफ देखते हुए कहा कि "रेहाना, क्या पीना पसंद करोगी?" तभी रेहाना ने मंद मंद मुस्कराते हुए टेबल पर पड़ा मेन्यू कार्ड अपने हाथ में लिया और कहा कि ," मुझे तो लेमन मिंट लेना है, आप भी कुछ पसंद कर लीजिए"।

रोहन ने वेटर को इशारा करके अपने पास बुलाया और २ लेमन मिंट लाने को कहा। तभी रेहाना ," आपको कुछ पसंद है तो वो भी ले सकते है"। रोहन ने मजाकिया अंदाज में कहा, " जो आपकी पसंद वहीं मेरी पसंद है"।

"ओह, फिर तो आपको सुबह 5 बजे जगना और फिर 6 बजे रोज़ मंदिर जाना भी पसंद होगा" रेहाना ने रोहन की तरफ व्यंग्य भरी मुस्कान बिखेरते हुए कहा। उसे पता था कि ऑफ़िस का काम ना हो तो रोहन 8 बजे से पहले जागने वालों में से तो बिल्कुल नहीं है और मंदिर तो रोहन ने जाना तभी से छोड़ दिया जब सिविल सेवा के फाइनल परिणाम से पहले वह 11 मंदिरों में मत्था टेक कर आया लेकिन लिस्ट तक में उसका नाम नहीं आया। रोहन आस्तिक ज़रूर है लेकिन वह मंदिर जाना और वहां भेट चढ़ाने की बजाए किसी अनाथालय या वृद्धाश्रम में जाकर ज़रूरतमंद लोगों की सेवा करना ही सबसे बड़ी भक्ति मानता था।

" रेहाना, आपने स्कूलिंग कहां से की है?" रोहन ने इस साइलेंट को तोड़ते हुए अपना पहला प्रश्न दाग दिया।

तो रेहाना ने कहा कि," माहेश्वरी पब्लिक स्कूल से स्कूलिंग करने के बाद महारानी कॉलेज से इकोनॉमिक्स ऑनर्स से स्नातक किया तथा अभी कुछ दिन पहले अपनी पी एच डी की डिग्री ली है"।

फिर रोहन ने अगला सवाल किया ,"आपने करियर के बारे में आगे क्या सोचा है?" रेहाना ने कहा, " ज्यादा कुछ नहीं, इस साल सिविल का एग्जाम देना है, आर ए एस तो 2 बार क्लियर कर चुकी है, अब सिविल का ही ख़्वाब है जो कि मेरे पापा का भी सपना था" इतना कहते हुए रेहाना कुछ सोचते हुए अचानक से सीरियस हो गई उसकी आंखे नम हो गई।

रेहाना ने बताया कि उसके पापा का 2006 में ही स्वर्गवास हो चुका था। तीन भाई और चार बहनों में वह सबसे छोटी थी। उसके परिवार ने काफी स्ट्रगल करके अपना नाम किया है और पापा का सपना था कि मैं प्रशासनिक अधिकारी बनूं।

इसी सपने को पूरा करने के लिए रेहाना ने दिन रात एक कर दिए। अपनी बड़ी बहन की लगन के दिन भी उसने कोचिंग नहीं छोड़ी हां ये बात ज़रूर है कि कोचिंग से आने पर बड़ी बहन की मार ज़रूर खानी पड़ी।और उसी सपने को पूरा करने की जद्दोजहद ने आज उसे इस सम्मानजनक मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया। तभी वेटर आ गया, " मैम, लीजिए ये आपका लेमन मिंट। और कुछ ऑर्डर करोगी मैम?"

तभी रेहाना ने अपने आपको संभाला और रुमाल से अपनी भीगी पलकों को पोंछते हुए कहा कि," अभी कुछ नहीं चाहिए"। फिर वेटर वहां से चला गया।

अचानक बने इस सीरियस माहौल से रेहाना को बाहर निकालने के लिए रोहन ने आँख मारते हुए कहा ," इकनॉमिक सर्वे लाया हूं पढ़ना है क्या"? (ये इकनॉमिक सर्वे पर दोनों की एक कहानी है जो अगले अंक में आएगी) तभी रेहाना ने ज़ोरदार हंसते हुए कहा कि ,"आप भी ना। खुद तो कुछ पढ़ते नहीं और मेरी पढ़ाई भी खराब करवा दी।"

बस फिर तो रेहाना शुरू ही हो गई," आपको क्या, घर पर मिलने बुलाया तो कहा कि पहले बाहर मिलते है फिर घर तक पहुंचना ठीक रहेगा। और चले गए मुझसे बिना मिले।" और भी बहुत कुछ रेहाना के द्वारा गीरियाया जा रहा था रोहन तो चुपचाप उसके चेहरे के हावभाव देखे जा रहा था। उस तो समझ ही नहीं आ रहा था कि कैसे चुप कराया जाए। लेकिन उसे एक बात ज़रूर समझ सा गई थी कि ये ही उसकी लाइफ पार्टनर बनने की सच्ची हक़दार है और रेहाना उसे बहुत पसंद करती है। रेहाना ही वह लड़की है जिसे वह खोज रहा था । कहते है ना कि "छोटी- छोटी बातों पर वो तकरार करने लगी है लगता है कि अब वो प्यार करने लगी है"।

सपना मेहनत ख़ोज

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