गेट नं. 2
गेट नं. 2
आज कॉलेज में प्रोग्राम है। सभी पुराने मित्र मिलेंगे यही सोचते हुए अंजू कॉलेज में 10 वर्ष बाद उसी गेट नं. 2 से प्रवेश करती है जिससे पहले दिन किया था। वो अपना पहला दिन याद करते हुए आगे बढ़ रही है तभी आवाज आयी
"अंजू, रुक तो जरा"पीछे मुड़कर देखा तो जाकर गले ही लगा लिया, वह थी उसकी प्यारी सहेली, रूम पार्टनर, सीनियर रीना। दोनों ने पुरानी यादें तजा की और अपने अपने क्लासमेट से भी मिले।
फिर शाम को दोनों उसी ज्यूस सेंटर गई जहां हमेशा जाती थी। शायद वह जगह कई लोगों की यादों में थी, इसलिए वहां पर कॉलेज के कई पुराने छात्र बैठे हुए है1। कुछ लोगों से मिलने के बाद यह दोनों एक जगह जाकर बैठ गयी। तभी सामने से रीना का एक मित्र आता है, उमेश। अंजू का कॉलेज का पहला दिन, उमेश ने उसकी रैगिंग ली थी। उसके बाद भी कभी-कभी रीना के साथ होने की वजह से उमेश से मुलाकात हो जाती थी। उमेश भी आकर इन्हीं के साथ बैठ गया। सब अपनी अपनी बातें करने लगे, क्या कैसा चल रहा है, जिंदगी कैसे बीत रही है, काम कैसा चल रहा है।
कॉलेज मे होते है तभी तक हम जूनियर सीनियर होते है बाद मे इसमे कोई फर्क नही रह जता। एक ही कॉलेज से है तो अपनापन सा लगता है। अंजू की बात सुन रीना को भी आश्चर्य हुआ। उसका तलाक हो गया था और वह अब अपने 3 साल के बेटे की देखभाल कर रही है। उमेश उठकर चला जाता है, यह कहकर कि उसे कुछ और मित्रों से मिलना है। पर रीना समझ गई, उमेश अंजू को पसंद करता था। उमेश का पहला प्यार थी अंजू। वो तो अंजू से शादी करने के सपने भी देखता था। पर यह सब अंजू को पता नहीं था। रीना को रोक रखा था उमेश ने कि वो अपने प्यार के बार मे खुद उसे बतायेगा।
अंजू की शादी के बाद रीना से बात नही हुई थी। पर रीना और उमेश मे अकसर बातें होती थी। इसलिये रीना को पता है उमेश की पत्नी की मृत्यु 2 साल पहले एक कार एक्सीडेंट में हो गयी थी।
कुछ दिन बाद उमेश रीना को कहता है, "अब जब अंजू से फिर से मुलाकात हुई कॉलेज में तो लगा शायद किस्मत ने मुझे एक और मौका दिया है अपने पहले प्यार को पाने का। मैं अपनी पूरी कोशिश करना चाहता हूं।"
उमेश किसी बहाने अंजू से मिलता है। फिर और कुछ मुलाकातें होती है। दोनों में अच्छी दोस्ती हो जाती है। उमेश, अंजू के बेटे से भी मिलता है। फिर आखिर हिम्मत कर एक बार बोल ही देता है, "अंजू, तुम मुझे पसंद हो, बहुत ज्यादा। अब से नहीं तब से जब मैंने तुम्हें पहली बार कॉलेज में देखा था। तुम्हारा पहला दिन, तुम थोड़ी डरी हुई, पर जब मैंने रोका तो तुमने ऐसे दिखाया जैसे तुम्हें कोई फर्क ही नहीं पड़ा। अपने डर को छुपाकर मेरे सवालों का जवाब दे रही थी और वह झिझक तब तक थी जब तक हम कॉलेज में थे। कॉलेज के बाद मैंने सोचा था तुमसे मिलने का और तुम्हें बताने का, पर मेरे हालात इसकी इजाजत नहीं देते थे। और जब सब ठीक हुआ तब तक तुम्हारी शादी हो गई थी। मैंने हमेशा तुम्हें दुआएं दी,फिर अचानक हमारी मुलाकात कॉलेज में उसी मोड़ पर हुई जहाँ पहली बार मैंने तुम्हें देखा था। मैं रीना के साथ ही था जब मैने दुर से तुम्हे उस गेट नं. 2 से आते देखा। मानो, मैने वही पल फिर जी लिया हो। तुम्हारे बारे में तुमसे वह सब सुन अच्छा नहीं लगा इसलिए वहां से चला गया। पर फिर अपनी किस्मत पर भरोसा नही हुआ। एक बार फिर प्यार करने की उम्मीद, प्यार पाने की उम्मीद दिखाई दी। क्या तुम मुझे खुद को प्यार करने की इजाजत दे सकती हो? मैं तुम्हें हमेशा खुश रखूंगा। क्या तुम अपने बेटे को मुझे पापा बुलाने की इजाजत दे सकती हो?"
अंजू पहले तो कुछ नहीं बोली पर कुछ ही दिनों में उमेश को खाने पर बुलाया, अंजू का बेटा भी साथ ही है। वो उमेश के पास जाकर कहता है, "पापा, हम सब साथ में रहेंगे तो बहुत मजा आएगा।"

