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Rashmi Sthapak

Abstract Inspirational Others

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Rashmi Sthapak

Abstract Inspirational Others

दोहे रश्मि के

दोहे रश्मि के

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जिसका छोटा काम है,

करता शोर महान।

ज्ञानी खुद बोलें नहीं,

बोले उनका ज्ञान।।


मन में बसते देवता,

तन का तो बस नाम।

केवट के दर पर खड़े,

रघुपति राजा राम।।


मानव मन चंचल बड़ा,

इसका ओर न छोर।

ऊपर वाला है सदा, 

थामें सब की डोर।।


कल कल बहती है नदी,

करती कब आराम। 

धड़कन पल-पल यह कहे, 

चलना तेरा काम।।


दीवानी महकी हवा,

बूँदें बहकीं आज।

सरगम मन में गूँजता,

घटा बजाती साज।।


कभी सुलगती है धरा,

कभी बरसता नीर।

जीवन में संग्राम से,

 सदा निखरते वीर।।



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