STORYMIRROR

Rashmi Sthapak

Others

4  

Rashmi Sthapak

Others

दोहा-दरबार

दोहा-दरबार

1 min
329

***************

 फागुन की आमद सखी,

 मन में भरे उमंग।

रंग रंगीली चूनरी,

भीगे सातों रंग।।

**************

 प्रेम भरे इसरार की,

पिचकारी ले थाम।

 बरसाने की राधिका,

 फिरती ढूँढे श्याम।।

***************

 कौन भला रोके उसे,

 कौन करे मनुहार।

श्याम रंग जिस पर चढ़े,

 उतरे नहीं खुमार।।

***************

जोगन बन मीरा कहे,

भूली मैं घर- द्वार।

 जोगी तेरे रंग में,

भीगे सब संसार।।

****************

हथियारों से अब नहीं,

दुनिया हो बेहाल।

पिचकारी में प्रेम के,

भर लो रंग गुलाल।।

 ****************

रंग उड़े बस प्रीत का,

सुख का उड़े अबीर।

प्रेम बिना सब झूठ है,

गाता फिरे फकीर।।

***************



Rate this content
Log in