STORYMIRROR

Bhawna Kukreti Pandey

Tragedy

4  

Bhawna Kukreti Pandey

Tragedy

सच तो नहीं ?

सच तो नहीं ?

1 min
258

मैं कभी नहीं

चाहती ख्वाबों में भी

तुमको स्याह रंग में

सोचना क्योंकि

तुम्हे चुना था

मैंने ही दिल के

खूबसूरत खिलते रंग में

सोचने को।

मगर उजालों में

तुम मुझे क्यों बार बार

अजनबी से दिखते हो,

क्यों जहरीला कर देते हो

मेरे खुशी का प्याला

पीने से पहले ही?!

क्यों सवाल

उठने लगा है जहन में

सही हो क्या

मेरे दिल के लिए?!

कहीं हम एक दूजे को

दूध और नमक से

तो नहीं।

उफ्फ

कहीं यही सच

तो नहीं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy