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Sanjay Jain

Abstract

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Sanjay Jain

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आंसू

आंसू

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मेरे आंसुओं की कीमत,

कोई क्या समझेगा।

लगे है घाव जो दिल पर,

उन्हें कोई क्या समझेगा।


क्या कोई मेरे घावों पर,

मलहम आ कर लगाएगा।

मेरे दुखते हुए दिल को,

कोई तो धैर्य बंधायेगा।


दिल की धड़कने मेरी,

बहुत तेज चल रही।

क्या उन्हें कोई,

आ कर शांत करेगा।


और मेरे दिल में, 

अपने जगह क्या बनापायेगा।

बिखर चुकी मेरी दुनियाँ,

को क्या कोई फिरसे बसाएगा।


अपने प्यारे शब्दों से,

मेरे दिल को बहलाएगा।

मेरे आंसू मेरी कहानी,

कह रहे है लोगो।


की कितना कुछ सहा,

मेरे इस दिल ने लोगो।

अब और सहा नहीं जाता,

मेरे इस शरीर से।

अब में कब्र में पाव,

लटका कर बैठ गया हूँ।


समर्पित कर दिया मैंने,

अपने आप का जीवन।

अब इच्छा है नहीं मेरे,

और संसार मे जीने की।


क्योंकि बहुत देख लिया मैंने, 

अपनी इस छोटी सी उम्र में।

अब प्रभु सेवा से बढ़कर 

कुछ भी नहीं मेरे जीवन में।


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