STORYMIRROR

संजय कुमार

Romance

3  

संजय कुमार

Romance

ले चल हमें बहार में

ले चल हमें बहार में

1 min
70

चल ले चल हमें बहार में उस

जहां प्यार के रंग सदा खिलते हों

जहां आता जाता कोई न हों 

जहां प्यार वाले ही मिलते हों 

इस जलती दुनियां से दूर रहें

कोई ऐसी जगह तु मुझे बता 

दुनियां वीरान न चाहूं मैं

तु अपने बाहोंं में मुझे बिठा

दूर दूर तक भटक रही मैं

वैसा स्थान न कहीं मिला

जैसा स्वर्ग मैं चाहती थी

स्वर्ग वैसा तेरे बाहोंं में मिला

चल ले चल हमें बहार में उस

जहां प्यार के रंग सदा खिलते हों!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance