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Kishan Negi

Tragedy

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Kishan Negi

Tragedy

अदद दर्द की तलाश में

अदद दर्द की तलाश में

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मारा-मारा फिर रहा हूँ दर्द की तलाश में 

जमाखोरों की मंडी में अब दर्द नहीं मिलता 

वो चिल्लाती थी कोई बचाले आबरू उसकी 

नपुंसकों के शहर में कोई मर्द नहीं मिलता


कुल्हाड़ी की धार ने काट दिए दरख़्त सारे 

जहाँ कभी बहार थी अब बसंत नहीं खिलता 

बालक अब अपने पांवों पर खड़ा हो गया है 

ढूँढो तो कभी अंदर कभी बाहर नहीं मिलता


संभल कर रखना क़दम इस शहर में जनाब 

यहाँ लाचारी के पैबंद कोई दर्जी नहीं सिलता 

काश, बचपन की शैतानियाँ फिर लौट आती 

नए दौर में बचपन-सा कोई यार नहीं मिलता


सूना है इस शहर का हुक्मरान बहुत कड़क है 

उसकी इजाज़त के बिना यहाँ पत्ता नहीं हिलता 

मेहरबानी करके कोई उसका ठिकाना बता दे 

कभी इस शहर तो कभी उस शहर नहीं मिलता।



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