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Raghu Deshpande

Romance

3  

Raghu Deshpande

Romance

विनवणी......!!

विनवणी......!!

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हो निवांत, घे विसावा

घोर जीवा, खूप झाला...! 


साथ तुझी, ती सावली

तू माउली, जगन्माता...! 


सुख दुःख, ते समान 

समाधान, मानीयलें....! 


मित्र,सखा, पत्नी,माता 

आजी नाता, रंगविल्या...!


उत्तरार्ध, पैलतीरी 

ती तयारी, सुरु झाली...!


चार अंक, झाले आता 

अंती घंटा, वाजणार....!


सात जन्म, सात फेरे 

साथ तु रें, द्यावी मज...!


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