रोहित वर्मा

Abstract Romance Others


4.1  

रोहित वर्मा

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यशी और मोबाइल की घंटी

यशी और मोबाइल की घंटी

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एक दिन यशी के मोबाइल पर किसी का फोन आया लेकिन वह कुछ बोल नहीं रहा था.

 वह डर गई कि किसका फोन आ रहा है और कुछ बोल नहीं रहा.

रोज की तरह उसको कॉल आने लगी .वह काफी डरने लगी क्योंकि कुछ बोल नहीं रहा.

 फिर उसने अपना फोन पापा को दे दिया फिर भी बजने लगा और हैरानी की बात यह थी कोई कॉल यशी को आयी ही नहीं वह उसका वहम था.

यशी की ज़िन्दगी की कुछ पुरानी बात याद आ गई जब उसका कोई अपना उसको कॉल करता था और बोलता था.

यशी तुम सुन रही हो न और कोई नहीं उसके कॉलेज का दोस्त था जो यशी के प्रति दिल में चाहत रखता था यशी दिन भर किसी के साथ लगी रहती थी और वह कॉल करता था और बोलता यशी तुम सुन रही हो न.

  उस लड़के को इसी वजह से कॉलेज से निकाल दिया जाता.  

लेकिन वह ये बोलता मै जा तो रहा हूं याद रखना मेरी चाहत ज़िन्दगी भर तुम्हारे दिमाग में रहगी और कुछ दिनों बाद यशी बिल्कुल अकेली होने लगी और उसको लगता उसका मोबाइल बज रहा है लेकिन वहम में चली गई. 

यशी जवान भी हो रही थी लेकिन उसके अंदर फोन का डर उसको खोखला करने लगा लेकिन जब लड़के वाले यशी को देखने आए तो वह हैरान हो गई क्योंकि वह लड़का कोई नहीं उसके कॉलेज का दोस्त था वह लड़का उसकी हालत देख कर हैरान हो गया वह रोने लगी और बोली तुम सही थे मै गलत. दोनों की शादी हो गई और खुशहाल जिंदगी जीने लगे .

शिक्षा :-आप किसी को पाने की चाहत मत रखो किस्मत आपको खुद ही मिला देगी

 


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