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Geeta Upadhyay

Romance

2  

Geeta Upadhyay

Romance

वो ख़त

वो ख़त

2 mins
190

           

अरे आज तो कमाल हो गया चादर फाड़कर रुमाल हो गया। यह तो मेघा की सहेली प्रिया की आवाज़ थी, अच्छा चलो शाम को बात करती हूं, कहकर मेघा ने पति का फोन काट दिया। तुम यहां कैसे तुमने तो मुझे चौंका दिया मेघा की खुशी का ठिकाना नहीं था। देख यार अगर मिलने की ख़्वाहिश होना तो पूरी कायनात हमें मिलाकर ही छोड़ती है। बरसों बीत गए तेरी शादी के बाद तो हम मिले ही नहीं। कैसी है हँसते हुए प्रिया बोली सब बढ़िया तू सुना प्रदीप और बच्चे कैसे हैं सुना था तुझे बेंगलुरु में नौकरी मिल गई तू वही रहती है ना तेरा कोई पता ना कोई फोन नंबर। सुनकर टीवी प्रिया एकदम शांत हो गई, क्यों क्या हुआ भाई इतनी खामोश क्यों है। कुछ नहीं मैंने आज तक शादी नहीं की। अब कब करेगी अब तो बच्चों की शादी का भी वक्त हो चुका है। कॉलेज के दिनों में प्रदीप और प्रिया के प्यार के किस्से बहुत मशहूर थे वे एक-दूसरे को बेहद प्यार करते थे। उसके दादा ने बचपन में ही गाँव में करवा दी थी जब वह छोटा था कॉलेज खत्म होने के बाद उसका गुना करवा दिया।  इस बात का मुझे पता नहीं था उसने कभी बताया ही नहीं मैंने तो उसे सच्चे दिल से प्यार किया था उसकी ना बन पाए तो और किसी की कैसे बन सकती हूं। शायद मेरी किस्मत में ही यही लिखा था देख आज तक संभाले हैं मैंने प्रदीप के दिए "वो खत।"



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