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Sukhwinder Singh A.R.

Romance

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Sukhwinder Singh A.R.

Romance

​वो आखिरी मुलाकात

​वो आखिरी मुलाकात

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बाहर बज रही शहनाई की धुन आज आर्यन के सीने में किसी ज़हरीले तीर की तरह उतर रही थी। कमरे का दरवाज़ा खुला और वो अंदर दाखिल हुआ। सामने रिया खड़ी थी—सुर्ख लाल जोड़े में सजी हुई, लेकिन उसका वजूद राख हो चुका था। उसकी आँखों से काजल आंसुओं के साथ बहकर उसके दर्द की गवाही दे रहा था। ​आर्यन को देखते ही रिया की बची-खुची हिम्मत जवाब दे गई। वह दौड़कर आर्यन के सीने से ऐसे जा लिपटी जैसे आंधी में कोई परिंदा अपना आख़िरी घोंसला तलाश रहा हो। ​"मुझे यहाँ से ले चल आर्यन! मैं मर जाऊंगी... हम कहीं दूर चले जाते हैं, भाग चलते हैं यहाँ से! मुझे इस घुटन से बचा ले..." रिया की चीखें आर्यन की शर्ट में दब रही थीं, लेकिन वो चीखें इतनी दर्दनाक थीं कि पत्थर का भी दिल दहल जाए। ​आर्यन ने अपनी आँखें कसकर भींच लीं। उसका अपना दिल टुकड़े-टुकड़े हो रहा था। हर एक धड़कन बगावत कर रही थी कि वो अपनी रिया का हाथ पकड़े और दुनिया की परवाह किये बिना उसे यहाँ से ले जाए। लेकिन उसने एक सर्द आह भरी और अपने कांपते हुए हाथों से रिया का आंसुओं से भीगा चेहरा उठाया। ​"मैं तुम्हें ले जा सकता हूँ मेरी जान," आर्यन की आवाज़ फटी हुई और दर्द से भारी थी, "लेकिन... बाहर मंडप में बैठे तुम्हारे बाबूजी की उस पगड़ी का क्या होगा? उनकी उस इज़्ज़त का क्या, जो उन्होंने ताउम्र कमाई है? अगर आज मैं तुम्हें यहाँ से ले गया, तो समाज उस पगड़ी को अपने पैरों तले रौंद देगा।" ​रिया तड़प उठी, "तो क्या मैं तुम्हारे बिना घुट-घुट कर मर जाऊं? क्या हमारे प्यार की कोई कीमत नहीं?" ​आर्यन की आँखों से आख़िरकार आंसुओं का एक कतरा छलक कर रिया के गाल पर आ गिरा। उसने बहुत बेबसी से कहा, "हमारे प्यार का महल तुम्हारे बाबूजी के आंसुओं और उनके झुके हुए सिर पर कैसे खड़ा हो सकता है रिया? मैं एक सच्चा आशिक हो सकता हूँ, लेकिन किसी बाप के सम्मान का कातिल नहीं बन सकता। मुझे माफ़ कर दो रिया... मुझे माफ़ कर दो।" ​आर्यन ने रिया को अपने और करीब खींचा, उसके माथे पर अपने कांपते हुए होंठ रखे और ऐसी आवाज़ में बोला जिसमें उसकी पूरी जिंदगी का निचोड़ था: ​"मत रो मेरी जान... ये दूरियां सिर्फ जिस्मों की हैं। जिंदगी से चाहे तुम्हें मैंने गंवा दिया हो... पर इस दिल में तो तू ही बसती है, और आखिरी सांस तक सिर्फ तू ही बसेगी।" ​तभी बाहर से आवाज़ आई, "रिया बेटी! नीचे आ जाओ, फेरों का वक़्त हो गया है।" ​ये आवाज़ किसी मौत के फरमान से कम नहीं थी। आर्यन ने धीरे-धीरे रिया की उंगलियों को अपनी शर्ट से आज़ाद किया। रिया वहीं फर्श पर घुटनों के बल गिर पड़ी, फूट-फूट कर रोते हुए। ​आर्यन मुड़ा और भारी कदमों से दरवाज़े की तरफ बढ़ गया। उसने पलट कर नहीं देखा, क्योंकि वो जानता था कि अगर उसने मुड़कर देखा, तो वो अपनी सारी कसमें और मर्यादा भूल जाएगा। दरवाज़ा बंद हुआ, और उसी के साथ दो धड़कते हुए दिलों की दुनिया हमेशा के लिए उस अँधेरे कमरे में दफ़न हो गई।


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