एक मुकम्मल खत: सोया का सपना
एक मुकम्मल खत: सोया का सपना
कॉलेज का सारा शोर-शराबा नीचे ग्राउंड में छूट गया था। पुरानी बिल्डिंग की सबसे ऊपरी छत पर शाम की ठंडी हवा खामोशी से बह रही थी। ढलते सूरज की सुनहरी धूप में वहां एक पुरानी सी बेंच पर सोया बैठी थी। कॉलेज की सबसे मासूम, क्यूट और बड़ी-बड़ी भोली आँखों वाली सोया, जिसके चेहरे पर हमेशा एक डरी हुई सी नज़ाकत रहती थी। आज वो वहां दुनिया से छुपकर बैठी थी। उसकी गोद में एक छोटी सी गुलाबी डायरी थी और उसके कांपते हुए हाथ धीरे-धीरे उस पर कुछ लिख रहे थे। लिखते हुए उसकी आँखों में एक अजीब सी नमी थी और चेहरे पर एक मीठी सी शर्म। तभी वहां दबे पांव लकी आ गया। पूरे कॉलेज में अपने मज़ाक और हुड़दंग के लिए मशहूर लकी! लेकिन जैसे ही उसकी नज़र बेंच पर बैठी उस मासूम सी लड़की पर पड़ी, उसका वो सारा मज़ाकिया अंदाज़ जैसे हवा में उड़ गया। लकी के लिए सोया कोई आम लड़की नहीं थी; वो उसकी ज़िंदगी का वो ठहराव थी, जिसे देखकर लकी को सुकून मिलता था। लकी ने चुपचाप पीछे जाकर सोया के कंधे पर अपना हाथ रख दिया। सोया जैसे किसी मीठे सपने से झटके से बाहर आई। डर के मारे उसकी सांसें तेज़ हो गईं। उसने हड़बड़ाहट में डायरी बंद की और उसे कसकर अपने सीने से लगा लिया। उसकी बड़ी-बड़ी आँखें खौफ से और भी बड़ी हो गईं, जैसे किसी ने उसकी सबसे कीमती चोरी पकड़ ली हो। "क्या... क्या लिख रही थी इतनी गहराई से?" लकी ने अपनी आवाज़ को जितना हो सके, उतना नर्म रखते हुए पूछा। "कु... कुछ नहीं लकी... व.. वो बस नोट्स थे," सोया की आवाज़ इतनी कांप रही थी कि लकी को उसके दिल की धड़कन साफ सुनाई दे रही थी। सोया का चेहरा शर्म और डर से लाल टमाटर जैसा हो गया था। उसे लगा, अब लकी पक्का उसका मज़ाक उड़ाएगा। लकी खामोश रहा। उसने सोया की झुकी हुई नज़रों को देखा, फिर धीरे से घुटनों के बल ज़मीन पर बैठ गया ताकि वो सोया की आँखों में देख सके। "मुझसे भी छुपाओगी?" लकी की इस आवाज़ में कोई मज़ाक नहीं था, बल्कि एक ऐसी कशिश थी जिसने सोया को पिघला दिया। सोया के हाथ ढीले पड़ गए। लकी ने बहुत ही नज़ाकत से, जैसे कोई कांच का खिलौना पकड़ रहा हो, सोया के हाथों से वो डायरी ले ली। सोया ने डर के मारे अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं। एक आंसू टूटकर उसके गाल पर आ गिरा। उसे लगा कि लकी अभी ज़ोर से हंसेगा। लकी ने डायरी का वो पन्ना खोला। उस पर सोया की मोतियों जैसी हैंडराइटिंग में सिर्फ दो लाइनें लिखी थीं, लेकिन उन दो लाइनों में जैसे उस लड़की ने अपनी पूरी रूह निचोड़ कर रख दी थी: "एक सपना है मेरा... बस एक छोटा सा सपना... कि किसी दिन मैं पूरी तरह से तुम्हारी हो जाऊं, और तुम हमेशा के लिए मेरे हो जाओ।" लकी की सांसें जैसे वहीं रुक गईं। हवा का चलना भी उसे महसूस होना बंद हो गया। लकी, जो हर बात का जवाब एक चुटकुले से देता था, आज पूरी तरह से बेज़ुबान हो गया था। सोया के उस बेपनाह और मासूम प्यार ने लकी के अंदर तक एक झनझनाहट पैदा कर दी। उस एक लाइन में इतनी सच्चाई थी कि लकी की अपनी आँखें भीग गईं। काफी देर तक खामोशी छाई रही। कोई मज़ाक नहीं हुआ, कोई हंसी नहीं गूंजी। सोया ने डरते-डरते अपनी पलकें उठाईं। लकी डायरी पर कुछ लिख रहा था। लिखकर उसने डायरी वापस सोया की गोद में रख दी और बिना कुछ कहे, सोया के माथे को बड़े ही प्यार और सम्मान से चूमा। अगले ही पल लकी वहां से मुड़कर चला गया। सोया का दिल ज़ोरों से धड़क रहा था। उसके कांपते हाथों ने फिर से डायरी खोली। उसकी लिखी हुई उस लाइन के ठीक नीचे, लकी ने अपनी रफ राइटिंग में कुछ ऐसा लिखा था जिसने सोया की दुनिया बदल दी: "तुम्हारे इस सपने को हकीकत बनाने के लिए ही तो ये लकी ज़िंदा है। आज से मेरे हर कल पर, मेरी हर सांस पर, सिर्फ और सिर्फ तुम्हारा नाम है। मैं तुम्हारा था, तुम्हारा हूँ... हमेशा के लिए।" सोया ने डायरी को चूम लिया और उसे अपने सीने से लगा लिया। छत पर अब वो अकेली थी, लेकिन उसे लग रहा था जैसे पूरी दुनिया की खुशियां उसकी झोली में आ गिरी हों। उस शाम, एक बहुत ही मासूम लड़की का सबसे प्यारा सपना हकीकत में बदल चुका था। सुखविंदर की कलम से "प्यार जब अपनी सबसे सच्ची और मासूम शक्ल में होता है, तो उसे साबित करने के लिए बड़ी-बड़ी कसमों या महंगे तोहफों की ज़रूरत नहीं पड़ती। प्यार तो डायरी के पन्ने पर लिखे उस एक खामोश 'सपने' में बसता है, जिसे बिना बोले सामने वाला पढ़ ले और उम्र भर के लिए उसे अपनी हकीकत बना ले। जब कोई आपके डरे हुए कांपते हाथों से आपका वो सपना लेकर, उसे अपनी धड़कन बना ले... तो समझ लेना, आपने दुनिया की सबसे कीमती चीज़ पा ली है।"

