"गोलगप्पा प्रपोजल"
"गोलगप्पा प्रपोजल"
माहौल: कॉलेज के ऑडिटोरियम की दूधिया रोशनी। हवा में मोगरे की खुशबू और बैकग्राउंड में बजता हुआ गिटार का एक धीमा सुर। आज 'एनुअल डे' है, और पूरा कॉलेज एक ऐसी गवाही देने वाला है जो सदियों तक याद रखी जाएगी।
स्टेज पर लकी खड़ा है। वही शरारती आँखें, वही बिखरे हुए बाल, लेकिन आज उसकी आवाज़ में एक अजीब सी थरथराहट है। सामने पहली कतार में आर्यन, रिया, बबलू और समीक्षा बैठे हैं। और उनके बीच बैठी है हमारी सोया—सफ़ेद सूट में लिपटी, सादगी की मूरत, जिसकी आँखों में पूरी दुनिया की मासूमियत सिमटी हुई है।
लकी: (माइक पकड़ते हुए, गहरी सांस लेकर) "दोस्तों, अक्सर लोग कहते हैं कि मेरा दिमाग बहुत बड़ा है और मैं बहुत होशियार हूँ। लेकिन आज मैं अपनी एक हार कबूल करने आया हूँ।"
पूरे हॉल में सन्नाटा छा गया। लकी की नज़रें सीधे सोया पर टिकी थीं, जो हैरानी से उसे देख रही थी।
लकी: (एक कदम आगे बढ़ते हुए) "मैं एक ऐसी लड़की को जानता हूँ, जिसे मैं रोज़ 'छोटे दिमाग वाली' कहकर चिढ़ाता था। मुझे लगता था कि मैं बहुत स्मार्ट हूँ, पर हकीकत ये है कि उस लड़की की एक मासूम मुस्कान ने मेरे इस 'बड़े दिमाग' के सारे लॉजिक फेल कर दिए। सोया... क्या तुम्हें पता है कि तुम्हारी सादगी ने मेरे दिल में कितनी बड़ी जगह बना ली है?"
सोया का चेहरा धीरे-धीरे गुलाबी होने लगा। उसके हाथ कांपने लगे। रिया ने चुपके से सोया का हाथ थाम लिया।
लकी: (स्टेज से नीचे उतरते हुए) "लोग हीरे मांगते हैं, सितारे मांगते हैं। पर मुझे क्या चाहिए? मुझे चाहिए वो सुबह की पहली हंसी, वो मासूम सवाल, और वो गुस्सा जो तुम गोलगप्पे छीनने पर दिखाती हो। सोया, मेरा ये दिल बहुत बड़ा है, पर ये तब तक अधूरा है जब तक तुम्हारा ये 'छोटा सा प्यारा दिमाग' इसमें आकर न बस जाए।"
लकी, सोया के ठीक सामने घुटनों के बल बैठ गया। पूरा कॉलेज अपनी सांसें रोक कर देख रहा था। लकी ने अपनी जेब से एक अंगूठी नहीं, बल्कि एक चांदी का छोटा सा 'गोलगप्पा' निकाला—जो उसकी शरारत और प्यार का संगम था।
लकी: "सोया, क्या तुम पूरी उम्र मेरे साथ गोलगप्पे शेयर करोगी? क्या तुम इस पागल लकी को हमेशा के लिए अपना दोस्त और अपना सब कुछ बनाओगी?"
सोया की आँखों से खुशी का एक कतरा गालों पर लुढ़क गया। उसने एक लंबी सांस ली और लकी की आँखों में आँखें डालकर बड़े ही भोलेपन से बोली:
सोया: "लकी... मुझे लगा था कि तुम सिर्फ मेरा गोलगप्पा छीन सकते हो, पर तुमने तो मेरा दिल ही छीन लिया। हाँ लकी! मैं तुम्हारे साथ पूरी उम्र गोलगप्पे खाऊंगी... पर शर्त ये है कि तुम कभी मेरा हिस्सा नहीं खाओगे!"
हॉल तालियों और सीटियों के शोर से गूँज उठा। लकी ने जैसे ही सोया को वो चांदी का गोलगप्पा पहनाया, वह जोश में खड़ा हुआ और... धड़ाम! उसका पैर सजावट के फूलों में उलझा और वह सीधे सोया की गोद में जा गिरा।
बबलू: (पीछे से चिल्लाते हुए) "रे लकी! यो तो कति 'प्यार में गिरना' सच कर दिया तूने!"
पूरा हॉल ठहाकों से भर गया। सोया अपनी मासूम हँसी हँस रही थी और लकी फर्श पर पड़ा मुस्कुरा रहा था। उसे मिल गई थी उसकी मंज़िल—दुनिया की सबसे मासूम हमसफ़र।
सुखविंदर की कलम से...
"दोस्ती और प्यार का ये संगम बड़ा प्यारा है,
मासूमियत के आगे देखो, शातिर दिमाग भी हारा है!
गोलगप्पे की चटनी सी है ये खट्टी-मीठी कहानी,
लकी की शरारत और सोया की सादगी है सबकी दीवानी!"

