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sukhwinder Singh

Fantasy Thriller

4  

sukhwinder Singh

Fantasy Thriller

रहस्यमयी किला और सोने का सिंहासन

रहस्यमयी किला और सोने का सिंहासन

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रात का अंधेरा घना हो चुका था। आर्यन, रिया, बबलू, समीक्षा और लकी सदियों पुराने 'वीरगढ़ के किले' के भारी-भरकम और जर्जर दरवाज़े के सामने खड़े थे। चारों तरफ सन्नाटा था, जिसे सिर्फ उल्लुओं की भयानक आवाज़ें चीर रही थीं। ​"भाई आर्यन, मुझे घर जाना है... यहाँ पक्का भूत होंगे!" बबलू के हाथ में पकड़ी हुई टॉर्च बुरी तरह कांप रही थी। "चुप कर बबलू! खजाना चाहिए या नहीं? बस मेरे पीछे-पीछे आ," लकी ने उसे चिढ़ाते हुए कहा। आर्यन ने एक गहरी साँस ली और रिया का हाथ पकड़कर किले के अंदर कदम रखा। उनके पीछे समीक्षा और लकी थे, और सबसे अंत में बबलू, जो लगातार आँखें बंद करके बुदबुदा रहा था, "जय श्री राम... जय श्री राम... बजरंगबली मेरी रक्षा करना!" ​किले के अंदर का रास्ता भूलभुलैया जैसा था। चारों तरफ मकड़ी के जाले और चमगादड़ों की फड़फड़ाहट थी। अचानक समीक्षा रुक गई। "रुको! यहाँ दीवार पर कुछ निशान हैं," उसने अपनी टॉर्च की रोशनी एक पुरानी नक्काशी पर डाली। लकी ने उन निशानों को ध्यान से देखा और दीवार के एक पत्थर को ज़ोर से दबाया। ​गड़गड़ाहट... की भारी आवाज़ के साथ एक गुप्त रास्ता खुल गया। धूल का एक बड़ा गुबार उड़ा। ​बबलू तो आवाज़ सुनते ही लकी के पीछे छुप गया, "गए... आज तो हम सब मारे गए! जय श्री राम!" रिया ने मुस्कुराते हुए कहा, "डरो मत बबलू, यह वही रास्ता है जिसकी हमें तलाश थी।" ​गुप्त तहखाने का दरवाज़ा वे उस संकरे और घुमावदार रास्ते से होते हुए किले के सबसे गहराई वाले हिस्से में पहुँच गए। वहाँ एक विशाल लोहे का दरवाज़ा था, जिस पर कई पुरानी जंजीरें लटकी थीं। आर्यन और लकी ने मिलकर पूरी ताकत लगाई और दरवाज़ा खोला। ​दरवाज़ा खुलते ही अंदर से इतनी तेज़ सुनहरी रोशनी आई कि एक पल के लिए सबकी आँखें चुंधिया गईं। ​सोने का कमरा और खजाने का समंदर जब उनकी आँखें रोशनी की अभ्यस्त हुईं, तो सामने का नज़ारा देखकर उनके होश उड़ गए। वो कोई साधारण कमरा नहीं था। वह एक विशाल शाही तहखाना था। बीचों-बीच एक विशाल सोने का सिंहासन रखा हुआ था, जिसमें अनगिनत लाल और नीले रंग के कीमती हीरे-मोती जड़े हुए थे। सिंहासन के दोनों तरफ आदमकद सोने की मूर्तियाँ खड़ी थीं, जिनके हाथों में असली हीरों से जड़ी तलवारें थीं। ​ज़मीन पर तो जैसे खजाने की नदी बह रही थी। बेशकीमती जवाहरात, सोने की मोहरें, और प्राचीन आभूषण हर तरफ बिखरे पड़े थे। ​"बाप रे बाप!" लकी की आँखें फटी की फटी रह गईं। बबलू का डर तो जैसे छूमंतर हो गया। उसकी आँखों में सोने की चमक दिखने लगी। "भाई आर्यन... हम तो करोड़पति नहीं, अरबपति बन गए! अब मैं पूरा गांव खरीद लूँगा!" बबलू ने झपटकर सोने के सिक्कों का एक ढेर उठाने के लिए हाथ बढ़ाया। ​लालच की परीक्षा "रुक जाओ बबलू! कुछ मत छूना!" आर्यन अचानक ज़ोर से चिल्लाया। उसकी आवाज़ से पूरा कमरा गूंज उठा। ​बबलू के हाथ हवा में ही रुक गए। "क्या हुआ भाई? भूत आ गया क्या?" रिया का ध्यान सिंहासन के पीछे की दीवार पर गया। उसने अपनी टॉर्च वहाँ जलाई। "आर्यन सही कह रहा है... वहाँ देखो।" ​सभी ने देखा कि दीवार पर खून जैसे लाल रंग से कुछ प्राचीन शब्द उकेरे हुए थे। समीक्षा ने धीरे-धीरे उसे पढ़ा, "यह खजाना वीरगढ़ की आत्मा है। जो इसे देखेगा, वह इतिहास का गवाह बनेगा। पर जिसने भी लालच में इसका एक भी कण चुराने की कोशिश की, वह इसी खजाने का कंकाल बन जाएगा।" ​तभी लकी ने अपनी टॉर्च नीचे की तरफ घुमाई। सोने के सिक्कों के ढेर के नीचे, उन्हें इंसानों के कई पुराने कंकाल दिखाई दिए। उन कंकालों की उँगलियों ने अभी भी सोने की मूर्तियों और सिक्कों को जकड़ा हुआ था। वे वही लोग थे, जिनका लालच उन्हें ज़िंदा वापस नहीं जाने दिया। ​बबलू यह देखकर चीख पड़ा और झटके से पीछे हट गया। "जय श्री राम! मुझे नहीं चाहिए कोई सोना! मेरी जान से बढ़कर कुछ नहीं है!" ​असली जीत आर्यन ने एक लंबी साँस ली और रिया की तरफ देखा। "दुनिया का सबसे कीमती खजाना यह सोना नहीं है रिया। यह इतिहास है। इसे यहीं रहना चाहिए।" रिया ने आर्यन का हाथ कसकर पकड़ लिया और मुस्कुरा दी। "तुम सही कह रहे हो। हमारी जान और हमारी यह दोस्ती इस पूरे खजाने से कहीं ज़्यादा कीमती है।" ​लकी और समीक्षा ने भी हामी भरी। उन्होंने उस अद्भुत और रहस्यमयी नज़ारे को अपनी आँखों में बसाया, लेकिन किसी ने भी एक मोती तक नहीं छुआ। ​वे सब बिना कुछ लिए उस तहखाने से बाहर निकल आए और दरवाज़ा हमेशा के लिए बंद कर दिया। किले के बाहर निकलते ही जब सुबह की पहली किरण उनके चेहरों पर पड़ी, तो उन्हें महसूस हुआ कि वे खाली हाथ होकर भी दुनिया के सबसे अमीर इंसान बन गए हैं। और बबलू? वह अभी भी पीछे मुड़-मुड़कर देख रहा था और मन ही मन कह रहा था, "भगवान का शुक्र है, बच गए!"


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