खूनी पगडंडी और लाल जोड़ा
खूनी पगडंडी और लाल जोड़ा
आग को पीछे छोड़कर समीक्षा की लाल स्पोर्ट्स कार गाँव की कच्ची सड़क पर धूल का गुबार उड़ाती हुई भाग रही थी। उसका सुर्ख लाल जोड़ा गियर बदलते वक्त उलझ रहा था, और उसकी भारी चूड़ियाँ डर के मारे आपस में टकराकर खनक रही थीं। जैसे ही उसने गाँव के पुराने, जर्जर प्रवेश द्वार (एंट्रेंस) पर अपनी गाड़ी मोड़ी, पीछे से आती पांच काली चमचमाती गाड़ियों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। टायरों के चीखने की आवाज़ ने गाँव के सन्नाटे को चीर दिया। समीक्षा के रईस पिता के गुर्गे, काली शर्ट और आँखों पर काले चश्मे चढ़ाए, गाड़ियों से ऐसे उतरे जैसे कोई शिकारी अपने शिकार को घेरता है। समीक्षा की सांसें अटक गईं, उसने कार का दरवाज़ा अंदर से लॉक कर लिया, उसकी आँखों में आंसू थे लेकिन चेहरा गुस्से से तमतमा रहा था। उसी वक्त, गाँव की उस धूल भरी पगडंडी से एक नौजवान गुज़र रहा था। उसके कंधे पर एक पुराना सा गमछा था और चाल में एक बेपरवाह अंदाज़। उसने इन विदेशी गाड़ियों को अपना रास्ता रोके देखा, तो वह रुक गया। वह जैसे ही उन गाड़ियों के बीच से निकलने की कोशिश करने लगा, एक गुर्गे ने अपना भारी हाथ उसके सीने पर रखा और उसे ज़ोर से पीछे की तरफ धक्का दे दिया। "ए साले! दिखता नहीं काम चल रहा है? अपनी ये फटी हुई शक्ल लेकर यहाँ से दफा हो जा, वरना इसी धूल में गाड़ देंगे!" गुर्गे ने दहाड़ते हुए कहा और उसे फिर से धक्का दिया। वो नौजवान ज़मीन पर नहीं गिरा, बल्कि बिजली की फुर्ती से अपने पैरों पर संभल गया। उसके चेहरे पर कोई गुस्सा नहीं आया, बस उसकी शांत आँखों में एक गहरा, खौफनाक सन्नाटा छा गया। उसने अपने कंधे से गिरता हुआ गमछा वापस संभाला और अपनी ठंडी नज़रों से उस गुर्गे को देखा। उन गुर्गों को अंदाज़ा भी नहीं था कि उन्होंने अपनी मौत के वारंट पर खुद दस्तखत कर दिए हैं। उस नौजवान की आँखों का वो सन्नाटा किसी बड़े तूफान के आने की आहट था। तभी गाड़ियों का सरदार समीक्षा की कार के शीशे पर अपनी बंदूक के हत्थे से वार करने लगा। "समीक्षा बीवी! आराम से बाहर आ जाओ, वरना ये कांच तुम्हारे इस खूबसूरत चेहरे को खराब कर देगा। मालिक का हुक्म है, तुम आज ही उस मंडप में बैठोगी!" समीक्षा ने अपनी खिड़की से बाहर देखा, उसकी नज़र उस शांत खड़े नौजवान पर पड़ी। उसे लगा शायद ये गाँव वाला उसकी मदद करेगा, पर फिर उसने देखा कि गुर्गे उसे फिर से धक्का मार रहे हैं। एक गुर्गे ने तो हद पार कर दी और उस नौजवान की कॉलर पकड़कर उसे रास्ते से हटाने के लिए अपनी लात उठा ली। जैसे ही उस गुर्गे का पैर हवा में उठा, हवा का रुख बदल गया। नौजवान ने बिना पलक झपकाए, गुर्गे के पैर को हवा में ही दबोच लिया। अगले ही सेकंड, हड्डी टूटने की एक ऐसी आवाज़ आई जिसने गाँव के शांत माहौल में सिहरन पैदा कर दी। गुर्गे की चीख निकलने से पहले ही वो नौजवान किसी साए की तरह उसके पास पहुँचा और एक ही वार में उसे धूल चटा दी। सारे गुर्गे अपनी बंदूकों और डंडों के साथ उस पर झपट पड़े। पर वो नौजवान कोई इंसान नहीं, मौत का फरिश्ता लग रहा था। उसकी फुर्ती ऐसी थी कि गोलियाँ उसे छू भी नहीं पा रही थीं। उसने एक हाथ से एक गुर्गे की बंदूक छीनी और उसे खिलौने की तरह मरोड़ दिया। एक-एक करके काली गाड़ियों के गुर्गे ज़मीन पर पड़े खून की उल्टियाँ करने लगे। समीक्षा कार के अंदर से ये मंज़र देख रही थी। उसका दिल धड़कना भूल गया था। लाल जोड़े में सजी वो खूबसूरत दुल्हन, जिसके हाथों की मेहंदी अभी ताज़ा थी, उस 'खतरनाक रक्षक' को देख रही थी जिसने बिना एक शब्द बोले मौत का तांडव मचा दिया था। सारे गुर्गे पस्त हो चुके थे। वो नौजवान अब धीरे-धीरे समीक्षा की कार की तरफ बढ़ा। उसके हाथों पर उन गुर्गों का खून लगा था, पर उसके चेहरे पर अब भी वही डरावनी शांति थी। उसने कार के शीशे पर अपनी उंगली से दस्तक दी। समीक्षा ने कांपते हाथों से कार का लॉक खोला। वो बाहर आई, उसका लाल जोड़ा उस धूल भरी ज़मीन पर बिखर गया। उसने ऊपर देखा, वो नौजवान उसके बिल्कुल सामने खड़ा था। उसकी लंबी परछाई समीक्षा के लाल जोड़े को ढक रही थी। "ये गाँव मेरा है," उस नौजवान की भारी आवाज़ गूँजी, "और यहाँ मेरी मर्ज़ी के बिना मौत भी कदम नहीं रखती। तुम सुरक्षित हो।" समीक्षा ने देखा कि उसके पीछे वो काली गाड़ियाँ अब सिर्फ कबाड़ का ढेर लग रही थीं। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो इस 'अनाम मौत' से डरे या इसे अपना खुदा माने। लेकिन एक बात तय थी, उसने आज़ादी की तलाश में एक ऐसी आग को हाथ लगा दिया था, जो उसे जला भी सकती थी और दुनिया से बचा भी सकती थी। नेक्स्ट
