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sukhwinder Singh

Comedy Inspirational Children

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sukhwinder Singh

Comedy Inspirational Children

​कस्टमर केयर वाली लॉटरी

​कस्टमर केयर वाली लॉटरी

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रसगुल्ले ​दोपहर का समय था। मोहल्ले की मशहूर 'पप्पू चाय वाली' टपरी पर आर्यन और रिया शांति से कुल्हड़ वाली चाय पी रहे थे। बगल की बेंच पर बबलू एक साथ दो समोसे मुँह में ठूंसने की जद्दोजहद कर रहा था, जबकि समीक्षा अपने फोन में कोई बहुत 'सीरियस' आर्टिकल पढ़ने में मगन थी। ​तभी सड़क के उस पार से लकी भागता हुआ आया। उसकी सांसें फूली हुई थीं, लेकिन चेहरे पर ऐसी चमक थी जैसे साक्षात कुबेर का खजाना मिल गया हो। ​"अरबपति! तुम्हारा भाई अरबपति बन गया!" लकी ज़ोर से चिल्लाया और पप्पू चाय वाले का गमछा छीनकर अपने गले में किसी वीआईपी शॉल की तरह डाल लिया। "आज से चाय-समोसा बंद! सीधा फाइव-स्टार होटल में पिज़्ज़ा खाएंगे!" ​बबलू के गले में समोसा अटक गया। खांसते हुए उसने पूछा, "क्या? तुझे किसने गोद ले लिया बे अचानक?" ​लकी ने अपनी शर्ट की जेब से एक मुड़ा-तुड़ा टिकट निकाला और उसे चूमते हुए बोला, "गोद नहीं बे बबलू! किस्मत मेहरबान हुई है। ये देख... 50 लाख की लॉटरी! आज के अख़बार में मेरा नंबर लगा है। तुम्हारा भाई अब मर्सिडीज़ में घूमेगा!" ​रिया ने अपनी चाय का कप नीचे रखा और हंसते हुए बोली, "लकी की शक्ल देख आर्यन, मुझे तो लग रहा है ये 50 लाख छोड़, 50 रुपये का टिकट भी उधार मांग कर लाया होगा।" ​आर्यन ने मुस्कुराते हुए हामी भरी, "सच-सच बता लकी, ये अख़बार आज का ही पढ़ा है ना तूने? या किसी पकोड़े वाले के लिफ़ाफ़े पर नंबर देख लिया?" ​लकी ने कॉलर खड़ा करते हुए ताव में आकर कहा, "अरे आर्यन भाई, तुम लोग हमेशा मेरी बेइज़्ज़ती करते हो! कल रात ही मैंने न्यूज़ चैनल पर नंबर मिलाया था। 50 लाख पक्के हैं! बबलू, जा जाकर गुप्ता जी के हलवाई की दुकान से 5 किलो रसगुल्ले और 2 किलो काजू कतली उठा ला। कह देना पैसे कल तेरा भाई देगा।" ​'5 किलो रसगुल्ले' सुनते ही बबलू के अंदर का सोया हुआ शेर जाग गया। वह बिना कुछ सोचे-समझे सीधा गुप्ता जी की दुकान की तरफ दौड़ पड़ा। ​पंद्रह मिनट बाद बबलू वापस लौटा। उसके दोनों हाथों में मिठाई के बड़े-बड़े डिब्बे थे और पीछे-पीछे मोहल्ले के दस-बारह लोग मुफ्त की दावत उड़ाने चले आ रहे थे। बबलू ने डिब्बे मेज पर पटकते हुए हांफ कर कहा, "लो भाई लकी! गुप्ता जी पहले तो उधार देने को तैयार नहीं थे, पर 50 लाख का नाम सुनते ही उन्होंने खुद डिब्बे पैक किए। बोले- 'लकी बाबू को मेरा सलाम कहना!'" ​लकी ने सीना चौड़ा किया और एक टूटी हुई प्लास्टिक की कुर्सी पर ऐसे टांग पर टांग रखकर बैठ गया जैसे किसी रियासत का राजा हो। बबलू ने तुरंत एक डिब्बा खोला और एक बड़ा सा रसगुल्ला अपने मुँह में डाल लिया। ​तभी समीक्षा, जो अब तक शांत खड़ी थी, आगे बढ़ी। उसकी नज़रें लकी की जेब पर गड़ी थीं। "लकी, बहुत हो गई तुम्हारी ये शेखचिल्ली वाली बातें। स्टैटिस्टिक्स (Statistics) के हिसाब से तेरे लॉटरी जीतने के चांस करोड़ में एक हैं। मुझे टिकट दिखा, मैं सीरियल नंबर मैच करूंगी।" ​लकी ने बहुत ही शान से वह मुड़ा हुआ टिकट निकाला और समीक्षा के हाथ पर ऐसे रखा जैसे कोई कोहिनूर हीरा सौंप रहा हो। "ले ले बहन! कर ले अपनी तसल्ली।" ​समीक्षा ने अपना चश्मा नाक पर सेट किया, एक हाथ में आज का अख़बार लिया और दूसरे हाथ में वो टिकट। आर्यन और रिया भी धीरे से उसके पीछे आ खड़े हुए। पूरी टपरी पर अचानक सन्नाटा छा गया। सिर्फ बबलू के रसगुल्ला चबाने की 'चप-चप' आवाज़ आ रही थी। ​समीक्षा की आँखें अख़बार से टिकट पर गईं। अचानक उसके चेहरे का रंग उड़ गया। उसने एक गहरी सांस ली और बिल्कुल ठंडी आवाज़ में पूछा, "लकी... तूने अख़बार में कौन सा नंबर देखा?" ​लकी ने लापरवाही से कहा, "अरे वही जो सबसे ऊपर मोटे-मोटे अक्षरों में छपा है! 1800-8899-0011!" ​समीक्षा ने एक ज़ोरदार ताली अपने ही माथे पर मारी। "अबे ओ 50 लाख के मर्सिडीज़ वाले मालिक! वो लॉटरी का विनिंग नंबर नहीं है! वो लॉटरी कंपनी का टोल-फ्री कस्टमर केयर नंबर है! जो हर टिकट के पीछे छपा होता है!" ​श्मशान घाट वाला सन्नाटा छा गया। बबलू के मुँह से आधा खाया हुआ रसगुल्ला नीचे गिर गया। ​आर्यन ने टिकट छीनकर देखा और अपना माथा पीट लिया। "और इतना ही नहीं महान आत्मा... इस टिकट की डेट देख! ये 2024 का टिकट है! दो साल पुराना टिकट तुझे सड़क पर पड़ा मिला और तूने सोचा तेरी लॉटरी लग गई?" ​रिया ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगी। "अरे बाप रे! कस्टमर केयर के नंबर को लॉटरी का नंबर समझ लिया! मैं तो हंस-हंस कर मर जाऊंगी आज!" ​लकी का चेहरा ऐसा हो गया जैसे किसी ने उसके ऊपर बाल्टी भर के बर्फ का पानी डाल दिया हो। उसकी 'वीआईपी' वाली शान एक सेकंड में गायब हो गई। ​तभी टपरी के बाहर एक बहुत भारी आवाज़ गूंजी। "अरे लकी बाबू! कहाँ हैं हमारे करोड़पति साहब?" ​सबने मुड़कर देखा। हलवाई गुप्ता जी, हाथ में बिल की एक लंबी पर्ची और पीछे दो मोटे-मोटे कारीगरों को लेकर खड़े थे। "ये लो बेटा, 4500 रुपये का बिल। लाओ, नकद निकालो, क्योंकि मर्सिडीज़ वालों को उधार सूट नहीं करता।" ​लकी ने आर्यन की तरफ बड़ी ही दयनीय नज़रों से देखा और अचानक अपनी छाती पकड़ कर ज़मीन पर गिर पड़ा, "हाय मेरी छाती, हाय मेरी छाती!" ​आर्यन ने दांत पीसते हुए कहा, "नाटक मत कर लकी! उठ चुपचाप!" ​रिया ने आगे आकर मोर्चा संभाला। उसने गुप्ता जी से हाथ जोड़कर कहा, "गुप्ता जी, बात ये है कि लॉटरी के पैसे आने में... अम्म... दो साल लगेंगे। और बबलू ने एक डिब्बा जूठा कर दिया है, तो हम वो वापस नहीं कर सकते।" ​गुप्ता जी की आँखें गुस्से से लाल हो गईं। "तो मेरे साढ़े चार हज़ार रुपये कौन देगा?" ​आर्यन ने लकी का कॉलर पकड़ा और उसे खींचकर खड़ा किया। फिर उसने बबलू की गर्दन पकड़ी। "गुप्ता जी, पैसे तो इनके पास नहीं हैं। लेकिन आपके पास दो नए मज़दूर ज़रूर आ गए हैं।" ​गुप्ता जी के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गई। ​अगले दो घंटों का नज़ारा देखने लायक था। 50 लाख की मर्सिडीज़ के सपने देखने वाला 'अरबपति' लकी अब हलवाई की दुकान के बाहर खड़ा पसीने से लथपथ समोसे तल रहा था। और मुफ्त के रसगुल्ले उड़ाने वाला बबलू अंदर बैठकर 4500 रुपये के हिसाब से जूठे बर्तनों का पहाड़ घिस-घिस कर साफ़ कर रहा था। ​सड़क के उस पार टपरी पर बैठे आर्यन, रिया और समीक्षा आराम से मुफ्त की काजू कतली खा रहे थे और लकी को देखकर हाथ हिला रहे थे। ​रिया ने काजू कतली का एक टुकड़ा आर्यन की तरफ बढ़ाते हुए कहा, "आर्यन, मर्सिडीज़ आए या न आए, पर आज की पार्टी तो सच में 50 लाख वाली हो गई!"


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