STORYMIRROR

sukhwinder Singh

Comedy

4  

sukhwinder Singh

Comedy

अनोखी आशिकी और कड़वा प्यार

अनोखी आशिकी और कड़वा प्यार

4 mins
0

शाम के धुंधलके में पंजाब की चौपाल पर सन्नाटा पसरा था, पर दूर से आती पायल की छनक ने उस सन्नाटे को एक मीठे सुर में बदल दिया। वो शहर से आई हुई ‘सोया’ थी। सोया का नाम ही नहीं, उसका हर अंदाज़ ही निराला था—शहद सी मीठी आवाज़, हिरणी जैसी आँखें और चेहरे पर एक अजीब सी मासूमियत, जैसे दुनिया के सारे दुखों से कोसों दूर हो। वह सिर्फ कुछ दिनों के लिए अपने रिश्तेदारों से मिलने आई थी, पर गांव वालों के लिए तो जैसे कोई परी उतर आई हो। ​उसी चौपाल के एक कोने में लकी खड़ा था, जो हमेशा शरारतों में सबसे आगे रहता था। उसने जब पहली बार सोया को देखा, तो जैसे उसका दिल धक-धक करना भूल गया। लकी ने बहुत सी लड़कियां देखी थीं, पर सोया के भोलेपन ने उसे एक ही पल में अपना गुलाम बना लिया। सोया की मासूमियत ही उसकी सबसे बड़ी खूबी थी—वह इतनी भोली थी कि हर किसी की बात पर सच मान लेती थी। ​लकी के दिल में आशिकी का भूत तो सवार हो गया, पर उसे सोया को प्रभावित (Impress) करने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा था। उसे लगा कि सोया शहर से आई है, इसलिए उसे 'अंग्रेजी' और 'रॉयल' अंदाज़ ही पसंद आएगा। बस फिर क्या था, लकी के दिमाग में एक खुराफाती और बेहद अजीब आईडिया कौंध गया। ​अगले दिन, जब सोया चौपाल से गुज़र रही थी, तो लकी अचानक बीच सड़क पर थरथराने लगा। उसने अपनी आँखें चढ़ा लीं, बाल बिखेर लिए और अजीब-अजीब आवाज़ें निकालने लगा। सोया उसे देखकर डर गई और सहम कर रुक गई। लकी ने अपनी एक्टिंग की दुकान खोल दी और टूटी-फूटी, भूतिया अंग्रेजी में चिल्लाने लगा, "ओह! आई एम कमिंग फ्रॉम लंदन! आई एम अ वैरी ओल्ड घोस्ट! गिव मी सम समोसा एंड बटर चिकन! आई वांट टू ईट!" ​सोया का मासूम दिल तो डर के मारे कांपने लगा। उसे लगा कि लकी सचमुच किसी विदेशी आत्मा के साये में है। वह परेशान होकर इधर-उधर देखने लगी। ​तभी आर्यन और रिया वहां से गुज़रे। उन्होंने जब लकी को इस हाल में देखा, तो वे एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा दिए। वे जानते थे कि लकी का यह ‘अंग्रेजी भूत’ सिर्फ एक नाटक है, ताकि सोया उसे नोटिस करे। पर उन्हें सोया का भोलापन भी दिख रहा था। उन्होंने सोचा कि क्यों न लकी को उसकी इस शरारत का मज़ा चखाया जाए, और साथ ही सोया को भी इस मज़ेदार खेल में शामिल किया जाए। ​समीक्षा ने अपनी किताब बंद की और बड़े गंभीर अंदाज़ में बोली, "आर्यन भाई, यह किसी विदेशी आत्मा का साया लगता है। इसका इलाज विज्ञान में नहीं, बल्कि 'देसी चमत्कार' में है।" ​आर्यन ने शरारत से रिया की तरफ देखा और एक योजना बनाई। उन्होंने बबलू को बुलाया, जो अपनी भैंस चरा रहा था। उन्होंने बबलू को एक पुरानी फटी हुई चादर ओढ़ाई, चेहरे पर ढेर सारी राख मली और उसे एक 'महान तांत्रिक' बना दिया। ​बबलू (नकली तांत्रिक) अपनी भारी आवाज़ में चिल्लाया, "बालक! इस पर बहुत ही खतरनाक अंग्रेजी भूत बैठा है। इसे भगाने के लिए हमें 'हिमालय का गुप्त अर्क' इस्तेमाल करना होगा।" ​लकी, जो अपनी एक्टिंग में डूबा था, थोड़ा घबराया। "व्हाट? व्हाट अर्क?" उसने भूतिया अंदाज़ में पूछा। ​रिया रसोई से एक बड़ा गिलास लेकर आई, जिसमें गहरे हरे रंग का गाढ़ा तरल पदार्थ था। दरअसल, वह ताज़ा कड़वे करेले और नीम का जूस था। आर्यन ने सोया की तरफ देखा और कहा, "सोया जी, आप बहुत मासूम हैं, इसलिए आपकी कोमल भावनाओं से ये भूत जल्दी भाग सकता है। ये 'जादुई काढ़ा' आप ही इसे पिलाएँगी।" ​सोया तो सचमुच इसे एक पवित्र काम समझ बैठी। उसने गिलास पकड़ा और कांपते हाथों से लकी की तरफ बढ़ी। "लकी जी, डरो मत। ये तांत्रिक बाबा ने दिया है, इसे पीने से आपको आराम मिलेगा," उसने इतनी मासूमियत से कहा कि लकी का दिल पिघल गया। ​लकी को सोया का भोलापन देखकर उस पर बहुत प्यार आ रहा था, पर वो गिलास! उसकी कड़वी महक सूंघी तो उसकी रूह कांप गई। वह पीछे हटने लगा, "नो! नो! मिस्टर घोस्ट डज़ नॉट लाइक दिस ग्रीन जूस!" ​लेकिन बबलू ने उसे दबोच लिया और बोला, "पी ले बेटा, वरना मुझे इसके सिर पर गरम पानी डालना पड़ेगा!" ​जैसे ही सोया ने जबरदस्ती एक घूँट लकी के मुँह में डाला, कड़वाहट के मारे लकी की आँखें बाहर आ गईं। उसका भूतिया अंदाज़ एक ही पल में गायब हो गया और वह शुद्ध देसी भाषा में चिल्लाया, "ओए मर गया! ओए ये क्या पिला दिया? मेरा गला जल गया! भागो यहाँ से!" ​लकी हवा की रफ़्तार से वहाँ से भाग निकला। आर्यन, रिया, समीक्षा और बबलू हँसते-हँसते लोट-पोट हो गए। सोया बेचारी समझ ही नहीं पाई कि क्या हुआ। उसे लगा कि भूत भाग गया। उसने मासूमियत से आर्यन से पूछा, "आर्यन जी, भूत तो भाग गया न?" ​आर्यन ने मुस्कुराते हुए कहा, "हाँ सोया जी, आपका भोलापन देखकर भूत क्या, दुनिया की हर कड़वाहट भाग जाएगी।" ​उस दिन लकी को कड़वा जूस तो पीना पड़ा, पर उसे सोया की मासूमियत और भी भा गई। उसने समझ लिया था कि सोया को प्रभावित करने के लिए 'अंग्रेजी' या 'नाटक' की नहीं, बल्कि सिर्फ़ अपनी सच्ची भावनाओं की ज़रूरत है। कड़वे जूस ने लकी की आशिकी को और भी मीठा बना दिया था।


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Comedy