"छोटा दिमाग, बड़ा धमाका"
"छोटा दिमाग, बड़ा धमाका"
शाम का वक्त था, सूरज ढल रहा था और कॉलेज के बाहर 'राजू गोलगप्पे वाले' की रेहड़ी पर रौनक लगी थी। यहाँ हमारी तीन सहेलियाँ—सोया, रिया और समीक्षा—खड़ी थीं। सोया, जो इतनी मासूम है कि उसे देखकर लगता है मानो अभी-अभी बादलों से उतरकर आई हो, अपनी प्लेट में गोलगप्पा आने का इंतज़ार कर रही थी। तभी अचानक पीछे से तीन 'तूफान' आए—लकी, आर्यन और बबलू। लकी अपनी चिर-परिचित मुस्कान के साथ सोया के करीब आया। रिया ने अभी एक करारा गोलगप्पा उठाया ही था कि आर्यन ने चीते की फुर्ती दिखाई और सीधे रिया के हाथ से गोलगप्पा छीनकर अपने मुँह में ठूँस लिया। आर्यन: (आँख मारते हुए) "वाह रिया! तुम्हारे हाथ का स्वाद ही कुछ और है। ऐसा लगा जैसे स्वर्ग का टिकट मिल गया!" रिया: (गुस्से से लाल होकर) "आर्यन! अपनी ये घटिया फिल्मी लाइनें बंद करो! तुमने मेरा सबसे तीखा गोलगप्पा चुराया है, इसका अंजाम बुरा होगा।" उधर, समीक्षा अपनी प्लेट में बड़े प्यार से दही और सोंठ डालकर गोलगप्पे को किसी दुल्हन की तरह सजा रही थी। तभी बबलू आया और पूरी प्लेट ही अपनी तरफ खींच ली। बबलू: "समीक्षा जी, इतनी सजावट तो दूल्हे की गाड़ी की भी नहीं होती! लाओ, इसे मैं अपने पेट में 'सेटल' कर देता हूँ!" (बबलू ने एक ही बार में गोलगप्पा साफ कर दिया और ठहाका मार कर हँसा) लेकिन सबसे ज्यादा 'जुल्म' हुआ हमारी मासूम सोया के साथ। सोया ने बड़ी मुश्किल से अपनी छोटी-छोटी उँगलियों में एक गोलगप्पा पकड़ा था और जैसे ही उसने मुँह खोला, लकी बीच में कूद पड़ा और सीधे उसके हाथ से गोलगप्पा छीनकर गटक गया। लकी: (खिलखिलाते हुए) "ओए होए सोया! तुम्हारा छोटा सा दिमाग सोचने में रह गया और मेरा बड़ा मुँह काम कर गया। थैंक यू फॉर द स्नैक!" सोया की मासूम आँखों में हल्की सी नमी आ गई। वह तुतलाते हुए बोली, "लकी... तुम हमेशा मेरी चीजें क्यों छीन लेते हो? क्या तुम्हारा पेट कभी नहीं भरता?" लकी ने सीना तानकर कहा, "अरे सोया, जिसका दिमाग बड़ा होता है, उसकी भूख भी बड़ी होती है। तुम्हारे छोटे दिमाग को क्या पता!" बस, यही वो पल था जब रिया, समीक्षा और सोया ने आँखों ही आँखों में एक 'सीक्रेट स्कीम' बना ली। रिया ने राजू गोलगप्पे वाले को इशारा किया और राजू ने चुपके से तीन 'स्पेशल बम' तैयार किए—ऐसे गोलगप्पे जिनमें लाल मिर्च का पेस्ट, काली मिर्च और करेले का रस भरा था। समीक्षा: (अचानक मीठी आवाज़ में) "अरे लड़कों, तुम तो गुस्सा हो गए! लो, अपनी नाराजगी दूर करो। ये लो हमारी तरफ से दोस्ती का 'स्पेशल' गोलगप्पा!" तीनों नमूने—लकी, आर्यन और बबलू—खुश हो गए। उन्हें लगा कि लड़कियां उनके 'स्वैग' से इम्प्रेस हो गई हैं। लकी ने सबसे बड़ा गोलगप्पा उठाया और सोया की तरफ देखकर बोला, "देखा! इसे कहते हैं पर्सनैलिटी।" जैसे ही तीनों ने वो 'मिर्ची बम' मुँह में डाला... अगले ही पल नज़ारा बदल गया! लकी: "आआआहहह! ओए सोया, पानी! मेरा गला जल गया! ये क्या था?" (लकी बंदर की तरह उछलने लगा) आर्यन: "मम्मी! मेरा मुँह है या भट्टी? रिया, तुमने तो तेज़ाब खिला दिया!" बबलू: "रे मर गए! यो तो कति ज़हर है! राजू, बाल्टी भर के पानी ला भाई!" लकी बेहाल होकर यहाँ-वहाँ भाग रहा था। तभी हमारी मासूम सोया उसके पास गई और बड़े प्यार से अपना खाली हाथ उसकी तरफ बढ़ाते हुए बोली: सोया: "लकी! अभी तो तुम कह रहे थे कि तुम्हारा दिमाग बहुत बड़ा है। बड़े दिमाग वाले को तो इतनी सी मिर्च नहीं लगनी चाहिए न? अब बताओ, किसका दिमाग छोटा है?" तीनों लड़के पानी के ड्रम में मुँह डालने के लिए भाग रहे थे और पीछे से रिया और समीक्षा ने एक-दूसरे को 'हाई-फाई' दिया। सोया बस मुस्कुरा रही थी, जैसे कह रही हो—मासूमियत का मतलब कमज़ोरी नहीं होता! सुखविंदर, कैसा लगा यह मास्टर एपिसोड? क्या लकी की हालत और सोया की मासूमियत भरी जीत ने आपका दिल जीत लिया?
