छपाक कुमार और स्विमिंग पूल का हंगामा
छपाक कुमार और स्विमिंग पूल का हंगामा
गर्मियों की उस चिलचिलाती दोपहर में, रिसॉर्ट के स्विमिंग पूल का नीला पानी किसी जादुई दरिया की तरह चमक रहा था। आर्यन ने अपने चार दोस्तों—रिया, बबलू, लकी और समीक्षा—के साथ वहां धमाल मचाने का प्लान बनाया। आर्यन का एकमात्र मकसद रिया के सामने अपनी 'हीरो' इमेज बनाना था। वह पूल के किनारे हॉलीवुड स्टाइल में काले चश्मे लगाकर स्लो-मोशन में चल रहा था, पेट अंदर खींचकर और छाती चौड़ी करके अपनी बॉडी फ्लॉन्ट करने की कोशिश कर रहा था। रिया और समीक्षा पूल के किनारे साइड में बैठीं नारियल पानी पी रही थीं और इन लड़कों की हरकतों को देखकर मुस्कुरा रही थीं। तभी सारा माहौल बदल गया जब बबलू का प्रवेश हुआ। बबलू अपनी कमर में एक बड़ी, चमकीली, पीली रबर की बत्तख वाली ट्यूब (Duck Tube) फंसाए, सिर पर एक अजीब-सी लाल रंग की स्विमिंग कैप और हाथ में हवा से भरा एक बड़ा सा रंगीन तरबूज लिए 'छपाक-छपाक' करता हुआ आ गया। उसे इस अजीबोगरीब अवतार में देखकर समीक्षा के मुंह से सारा नारियल पानी बाहर आ गया और रिया भी अपनी हंसी रोक नहीं पाई। आर्यन ने एक गहरी सांस ली, अपना चश्मा उतारा और सोचा कि अब एक जबरदस्त डाइव मारकर रिया को इम्प्रेस करने का सही समय है। वह पूल के किनारे खड़ा हुआ, हवा में उछलकर एक कलाबाजी वाली डाइव लगाने की कोशिश की, पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। किनारे पर पड़ी थोड़ी-सी काई पर उसका पैर फिसला और वो हवा में ही लहराते हुए मुंह के बल 'धप्प' से पानी में ऐसे गिरा जैसे कोई भारी बोरी गिरी हो। पानी के छींटे इतने जोर से उड़े कि रिया के चश्मे पर पानी पड़ गया और वो डरकर पीछे की तरफ गिरते-गिरते बची। उधर लकी, जो खुद को पूल का बेताज बादशाह समझ रहा था, सीढ़ियों से डरते-डरते पानी में उतरा। जैसे ही पानी उसकी कमर तक आया, वो "बचाओ-बचाओ, मैं डूब रहा हूँ!" चिल्लाते हुए बबलू की हवा वाली बत्तख पर छलांग मार बैठा। बबलू अपनी बत्तख बचाने के लिए लकी से भिड़ गया और दोनों पूल के बीचों-बीच गोल-गोल घूमने लगे। असली कॉमेडी तो तब शुरू हुई जब आर्यन, जो पानी के नीचे से बाहर निकला, अपने चेहरे पर एक हीरो वाला पोज़ बनाने की कोशिश कर रहा था, पर उसकी नाक से पानी बह रहा था और सिर पर एक पूल का पत्ता चिपका हुआ था। बबलू ने चुपके से पानी के अंदर एक गोता लगाया और आर्यन, जो अपनी पोज़ में खड़ा था, उसके पैर ऐसे खींचे कि आर्यन सीधे पूल के तल पर 'गुड़गुड़' करता हुआ पहुँचा। बाहर निकलते ही आर्यन का चेहरा ऐसा था जैसे उसने पानी के नीचे कोई ऑक्टोपस देख लिया हो। समीक्षा और रिया पेट पकड़कर हंसते-हंसते पूल किनारे ही लोटपोट हो गईं। तभी किसी ने पूल में एक बड़ी, गीली फुटबॉल फेंक दी। आर्यन ने उसे किक मारने की कोशिश की, पर पैर फिसलने के कारण बॉल उसके सिर पर ही लगकर पीछे गयी और आर्यन का मुंह पानी में 'फुर्स्स' करके समा गया। जब सब थक कर पूल से बाहर निकले, तब तक पूल का पानी जैसे रायते की तरह फैल चुका था—सबके चश्मे, कैप्स और वो हवा वाली बत्तख सब पूल में इधर-उधर तैर रहे थे। उस दिन के बाद से रिया और समीक्षा जब भी आर्यन को देखतीं, बस मुस्कुराकर एक ही बात कहतीं— "छपाक कुमार, एक और डाइव हो जाए?"
