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Sukhwinder Singh Rai

Inspirational

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Sukhwinder Singh Rai

Inspirational

​भूखा सुपरस्टार

​भूखा सुपरस्टार

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शहर का सबसे बड़ा ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज रहा था। स्टेज पर दूधिया रोशनी के बीच खड़ा आर्यन किसी ग्रीक देवता से कम नहीं लग रहा था। 'मिस्टर फिटनेस ऑफ द ईयर' की भारी-भरकम, चमचमाती ट्रॉफी उसके हाथ में थी और सामने हज़ारों लड़कियाँ उसके नाम के नारे लगा रही थीं। बाहर से देखने पर लगता था कि आर्यन के पास दुनिया की हर खुशी है, लेकिन उसकी उस कातिल मुस्कान के पीछे एक ऐसा खालीपन था जिसे कोई कैमरा नहीं पकड़ पा रहा था। उसका सख्त फिटनेस ट्रेनर और मैनेजर, सनी, स्टेज के ठीक नीचे खड़ा उसे घूर रहा था, मानो कह रहा हो कि एक इंच भी पेट बाहर नहीं निकलना चाहिए। स्टेज से नीचे उतरते ही सनी ने आर्यन के हाथ से वह चमचमाती ट्रॉफी झपटी और उसके हाथ में एक प्लास्टिक का टिफिन थमा दिया। आर्यन ने ढक्कन खोला और उसकी आत्मा रो पड़ी— फिर से वही उबला हुआ बिना नमक का चिकन और फीकी लौकी! पिछले छह महीने से आर्यन ने अपनी ज़बान पर स्वाद नाम की कोई चीज़ नहीं रखी थी। वह एक इंसान से ज़्यादा एक मशीन बन चुका था, जिसमें घास-फूस डालकर सिक्स-पैक निकाले जा रहे थे।

​अवार्ड फंक्शन के बाद की ग्रैंड पार्टी में हर तरफ पिज़्ज़ा, पास्ता और मिठाइयों की खुशबू उड़ रही थी। आर्यन एक कोने में खड़ा अपनी उबली हुई लौकी को ऐसे घूर रहा था जैसे वह उसका पुश्तैनी दुश्मन हो। उसका सब्र जवाब दे चुका था। जब सनी किसी बड़े प्रोड्यूसर से बात करने में मग्न था, आर्यन ने अपनी ट्रॉफी उठाई, सिर पर हुडी डाली और चुपचाप ऑडिटोरियम के पिछले दरवाज़े से बाहर भाग निकला। रात की ठंडी हवा में आज़ादी का अहसास था। वह बिना किसी मंज़िल के शहर की सड़कों पर भटक रहा था कि अचानक हवा के झोंके के साथ एक ऐसी सोंधी, मसालेदार और जानलेवा खुशबू आई, जिसने उसके दिमाग की सारी नसें खोल दीं। वह खुशबू उबलते हुए तेल में छनते गरमा-गरम समोसों और कचौरियों की थी। आर्यन के कदम अब उसके बस में नहीं थे। वह खुशबू उसे खींचती हुई एक छोटी सी, लेकिन बेहद गुलज़ार दुकान तक ले गई जिसके बोर्ड पर लिखा था— 'रिया कचौरी भंडार'।

​वहाँ बड़ी सी कड़ाही के सामने खड़ी थी रिया। एकदम बिंदास, बेफिक्र और चेहरे पर एक अजीब सा सुकून लिए, वह बड़ी महारत से कचौरियां तल रही थी। आर्यन सीधा जाकर काउंटर के पास खड़ा हो गया। उसकी आँखों में ऐसी भूख थी जैसे बरसों से भूखा शेर शिकार देख रहा हो। उसने अपनी 'मिस्टर फिटनेस' की भारी ट्रॉफी को टेबल के किनारे खिसकाया और भारी आवाज़ में बोला, "दो समोसे... और दो कचौरी... लाल और हरी चटनी डुबाकर देना।" रिया ने बिना सिर उठाए एक पत्तल में गरमा-गरम कचौरी और समोसे रखे और उसके सामने सरका दिए। आर्यन ने जैसे ही पहला निवाला अपने मुँह में रखा, उसकी आँखें बंद हो गईं। धनिया, सौंफ, अमचूर और तीखी हरी मिर्च का वह जादुई स्वाद उसकी ज़बान पर किसी धमाके की तरह फूटा। छह महीने की घुटन, वह फीकी लौकी का दर्द, सब एक पल में बह गया। वह पागलों की तरह चटनी से सने हाथों से खाने लगा। उसे कोई होश नहीं था कि वह शहर का सबसे बड़ा सुपरस्टार है।

​तभी दुकान के अंदर से रिया की पक्की सहेली, समीक्षा, बाहर आई। वह अपने फोन में आर्यन की ही तस्वीरें ज़ूम करके देख रही थी। अचानक उसकी नज़र उस हुडी वाले लड़के पर पड़ी जो चटनी में सना हुआ था, और फिर उसकी नज़र टेबल पर रखी उस सोने की ट्रॉफी पर गई जिस पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था 'आर्यन - द फिटनेस आइकन'। समीक्षा के हाथ से फोन छूटते-छूटते बचा। वह ज़ोर से चीखी, "रिया! रिया! ये... ये तो आर्यन है! मेरा आर्यन! भगवान, ये यहाँ कचौरी पेल रहा है?" रिया ने हैरानी से उस लड़के को देखा जिसका मुँह हरी चटनी से पुता हुआ था। इससे पहले कि रिया कुछ कह पाती, पीछे से गाड़ियों के ब्रेक लगने की ज़ोरदार आवाज़ आई।

​वहाँ सनी खड़ा था, हांफता हुआ और गुस्से से लाल-पीला। आर्यन को एक ठेले पर समोसे ठूंसते देखकर उसकी तो जैसे जान ही निकल गई। "आर्यन!" सनी इस तरह चीखा जैसे उसने आर्यन को कोई खून करते देख लिया हो। "ये क्या कर रहे हो तुम? तुम्हें पता है एक समोसे में कितनी कैलोरी होती है? तुम्हारे एब्स! तुम्हारा डाइट प्लान! तुमने सब बर्बाद कर दिया!" आर्यन डर के मारे सहम गया। उसके हाथ से आधा खाया हुआ समोसा छूटकर पत्तल में गिर गया। वह एक अपराधी की तरह सिर झुकाकर खड़ा हो गया; उसका वो सारा स्टारडम पल भर में एक डरे हुए बच्चे में बदल गया।

​यह देखकर रिया का खून खौल उठा। उसने अपनी कड़छी कड़ाही के किनारे पटकी और सनी के सामने आकर खड़ी हो गई। "ओए प्रोटीन शेक के डिब्बे! ज़रा आवाज़ नीचे रख अपनी!" रिया ने अपने उसी बिंदास लहज़े में कहा। "ये सिक्स-पैक एब्स हैं या आटे की लोई जो एक समोसे से पिचक जाएंगे? इंसान का शरीर है, कोई गुब्बारा नहीं जो हवा निकलने के डर से उसे भूखा मार दो।" सनी ने गुस्से से गुर्राते हुए कहा, "तुम गँवार क्या जानो फिटनेस क्या होती है! ये एक स्टार है!" रिया ने एक पल आर्यन की उन उदास आँखों में देखा और फिर सनी की तरफ मुड़कर एक गहरी बात कही, "स्टार होगा तुम्हारे लिए, पर है तो इंसान ही ना! तुम्हारी वो घास-फूस खाकर ये 'परफेक्ट' तो बन गया, पर क्या ये अंदर से ज़िंदा है? मैंने इसकी आँखों में वो सुकून देखा है जब इसने मेरी कचौरी का पहला निवाला खाया था। वो खुशी तुम्हारी इस निर्जीव सोने की ट्रॉफी में कहीं नहीं है। शरीर भूखा रहकर जो शोहरत मिले, वो इंसान को अंदर से खोखला कर देती है।"

​रिया की इन बातों ने आर्यन के अंदर जैसे एक सोई हुई आग को जगा दिया। उसे एहसास हुआ कि वह असल में एक पिंजरे में कैद था। आर्यन ने अपने चटनी वाले हाथ से सनी का हाथ झटक दिया। उसकी आँखों में अब कोई डर नहीं था। "सनी, रिया सही कह रही है," आर्यन की आवाज़ में एक अजीब सा ठहराव था। "मैं कोई रोबोट नहीं हूँ। मुझे भी ज़िंदगी जीनी है, मुझे भी स्वाद चाहिए। और अगर दो समोसे खाकर मेरा स्टारडम खत्म होता है, तो मुझे ऐसा स्टारडम नहीं चाहिए।" आर्यन ने पलटकर अपनी ट्रॉफी उठाई, जेब से कचौरी के पैसे निकालकर काउंटर पर रखे और रिया की तरफ देखकर एक बेहद सच्ची और सुकून भरी मुस्कान दी। "तुम्हारे हाथों में सच में जादू है रिया, आज तुमने सिर्फ मेरा पेट नहीं भरा, मुझे जीना सिखा दिया।" आर्यन ने समीक्षा के साथ एक सेल्फी ली और अपनी ट्रॉफी हवा में उछालते हुए, आज़ादी की साँस लेकर उस अंधेरी सड़क पर वापस चल पड़ा, लेकिन इस बार उसके चेहरे पर एक असली, बेफिक्र मुस्कान थी।

सुखविंदर की कलम से (Sukhwinder Singh A.R.)

​"दुनिया हमें हमेशा एक सांचे में ढालकर 'परफेक्ट' बनाने की दौड़ में धकेलती है। हम दूसरों की तालियों के लिए अपनी ही खुशियों का गला घोंट देते हैं। लेकिन याद रखिए, एक चमचमाती ट्रॉफी और झूठी शोहरत से कहीं ज़्यादा कीमती वो एक निवाला, वो एक पल की असली मुस्कान होती है जो आपके दिल को सुकून देती है। परफेक्शन के पीछे भागते-भागते कहीं इंसानियत और ज़िंदगी के छोटे-छोटे मज़ों को मत भूल जाना। असली खूबसूरती इसमें नहीं कि आप कैसे दिखते हैं, बल्कि इसमें है कि आप अंदर से कितने खुश हैं।"


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