विनय ,मुझे माफ कर दो
विनय ,मुझे माफ कर दो
दिसम्बर की कड़कड़ाती हुई ठंड में लिहाफ के अंदर सिकुड़ी सिमटी इला आंख बंद कर लेटी हुई नलिन के साथ फोन पर चैट करने की कोशिश कर रही थी ... तभी पापा की बातें उसके कानों में पड़ी थी .... अपनी लाडली को समझा देना ये नलिन का नाम जपना बंद कर दें ... वहां जाकर जब झाड़ू बर्तन करना पड़ेगा और दो नंदों की शादी की जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी तो सारा प्यार का बुखार उतर जायेगा .... मैंने नेट पर रिजल्ट कल देखा था वह इस बार भी नहीं मेन्स नहीं निकाल पाया है .... आखिर कब तक हम उसके पास होने का इंतजार करते रहेंगें ....आज शाम को रंजन भाईसाहब अपने दोस्त के लड़के को लेकर आ रहे हैं ....इला को समझा देना कि घर पर ही रहे ... बचपना न करे .... विनय बहुत ऊंचे पोस्ट पर है और 20 लाख का पैकेज है , मुंबई में अपना फ्लैट और गाड़ी सब है ... सिर पर कोई जिम्मेदारी नहीं है , एक बहन है वह अमेरिका में रहती है ... सुचित्रा जी स्कूल में टीचर हैं ... अपनी कोचिंग भी चलाती हैं ... सबसे बड़ी बात लेन देन की कोई बात नहीं है।
इला के कानों मे सारी बातें पिघले शीशे की तरह सुनाई पड़ गई थी । अब उसे समझ आ गया था कि नलिन क्यों नहीं उसका फोन उठा रहा है और ना ही मेसेज का उत्तर दे रहा है.... वह परेशान हो उठी थी लेकिन उसका फोन बराबर बंद ही आ रहा था ... अपनी मजबूरी पर उसकी आंखें छलछला उठीं थीं
“इला तुम्हारी चाय “, मां ने प्यार से उसके माथे को चूमा था .... वह उठी और मां के गले से लिपट कर सिसक पड़ी थी ... “क्या हुआ “?... “मॉम पापा को मना लो .... नलिन जरूर आई ए एस पास कर लेगा ....मैं उसके बिना नहीं रह पाऊंगीं .... मैं उससे प्यार करती हूं ...”
“बेटा प्यार तो शादी के बाद साथ रहने के बाद हो ही जाता है ... तुम मिल लो फिर देखते हैं ... जरूरी थोड़े ही है कि रिश्ता पक्का हो ही जाये ......मुंबई जैसी महानगरी और विनय जैसा स्मार्ट और एमएनसी में ऊंचे ओहदे पर .....अंधे को क्या चाहिये दो आंखें .... बस चट मंगनी पट ब्याह की तारीख भी तय हो गई थी ...।
उसने नलिन से संपर्क करना चाहा था परंतु उसका फोन ही बंद था और साथ में वह मां पापा की इज्जत का तमाशा नहीं बनाना चाहती थी ... जय माल और विवाह मंडप में इला के चेहरे पर विरक्ति और वेदना का भाव था ...वह प्रस्तर मूर्ति की भांति बैठी थी ....
विनय ने हनीमून के लिये काश्मीर की बुकिंग करवा रखी थी ...
"इला यहां आकर तुम्हें अच्छा नहीं लगा .... तुम्हारा प्यारा सा चेहरा हर समय बुझा बुझा सा क्यों रहता है ...."
वह झट से बोल पड़ी , "हां ...हां बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा क्यों कि तुमसे पहले मेरी जिंदगी में कोई दूसरा अपनी जगह बना चुका है ..."
इला चाह रही थी कि विनय उसकी हरकतों से परेशान होकर उससे यहां से जाने को कह दे तो वह नलिन की बाहों में खो जायेगी ..
विनय , “ इला माई लव ... आई विल मिस यू “ कहकर उसको अपनी बाहों मे जकड़ कर चूमने की कोशिश करता तो वह उसे अपने से परे धकेल देती ..
विनय ने कुछ दिनों तक कोशिश की लेकिन इला की बेरुखी उसे सहन नहीं हुई और उसका रवैया बदलने लगा था .... वह ऑफिस से देर रात लौट कर आने लगा था और यदि घर में रहता तो वह और उसका लैपटॉप और उसका फोन ... उसका प्यार खुमार उतर गया था ...उसने व्यस्तता के आवरण में इला से दूरी बना ली थी .विनय की बेरुखी और नलिन से संपर्क न हो पाने के कारण वह दुखी रहती तभी एक दिन नलिन का मेसेज देख करखुश हो गई और अपने प्यार से मिलने पहुंच गई थी ... ब्राण्डेड कपड़ों से सजा हुआ , अभिजात्यवर्ग की गरिमा से उसका व्यक्तित्व निखर उठा था ....
इला की सूनी आंखों को देख कर वह परेशान हो उठा था ... चल कुछ खाते हैं ... वह मुस्कुरा कर बोला, “तेरा पसंदीदा गार्लिक ब्रेड और चीज बर्गर “
मेरी पसंद तुम्हें आज भी याद है ... क्यों नहीं ....
“तुम ससुराल में खुश हो”, सुनते ही दोनों भावुक हो उठे थे
“यह मेरे जीवन का सबसे सुखद पल होगा ....
“तुमने तो आजीवन प्रतीक्षा करने का वादा किया था , शादी भी कर ली “
“तुमने मेरे मेसेज का उत्तर ही नहीं दिया .... विनय शादी को सीरियसली निभाना चाह रहा था लेकिन मेरी बेरुखी से परेशान होकर उसने अपनी दूसरी दुनिया बसा ली ....मैं निपट अकेली दोहरी जिंदगी जी रही हूं ... मेरे रोम रोम में तुम बसे हुये हो ...मैं तनहाइयों में तुम्हारे अक्स को ढूंढा करती हूं “
मैं भी तो तुम्हें नहीं भूला ... मेन्स निकाल लेने के बाद भी डिप्रेशन का शिकार बन गया था लेकिन उस समय निया ने मुझे सहारा दिया था .... लेकिन ये बताओ कि जब तुम अकेली थीं , तब तो तुम मेरे पास आ नहीं पाईं और ना ही अपने पैरेंट्स को मना पाईं ... और अब जब तुम्हारी जिंदगी में जिसमें तुम्हारे पति का परिवार भी शामिल है , उन सबको दुखी करके क्या तुम खुश रह पाओगी ....
उसे हमेशा जी जान से प्यार करने वाला नलिन आज उसे ही प्रश्नों के कटघरे में खड़ा कर रहा था ...क्या सच में विनय के साथ उसने अन्याय किया है ...
उसे तो नलिन परिवार के सम्मान के साथ ही चाहिये था ....” तुम नहीं समझोगे नलिन... स्त्री के दिल में प्यार होता है लेकिन वह अपने पैरेन्ट्स की इज्जत और सम्मान के लिये अपने प्यार को कुर्बान कर देती है..”
“अब देर हो चुकी है .... विधि के विधान को स्वीकार करो ... जो होना था वह हो चुका अब आगे का जीवन खुशी से जिय़ो ....निया ने सब कुछ जानते हुये मुझे अपनाया और प्यार किया इसलिये मैं उसे धोखा नहीं कर सकता .... “
आज नलिन न मिलता तो वह प्यार की गहराई को कैसे समझ पाती , होने वाली पत्नी के साथ उसकी निष्ठा और प्यार देख उसकी आंखें भर आईं थीं ....आज नलिन ने उसकी डूबती नैया को संवार दिया था ...
उसे समझ आ गया था कि अब राहें अलग अलग हो चुकी है ....वह विनय की बाहों में समा कर फफक पड़ी...थी “विनय मुझे माफ कर दो ।“

