वह व्हीलचेयर पर थी,
वह व्हीलचेयर पर थी,
आरव शहर के सबसे बड़े बिजनेस टायकून का इकलौता बेटा था। हैंडसम ऐसा कि लड़कियां उसे मुड़-मुड़ कर देखती थीं और दौलत ऐसी कि वह जो चाहे खरीद सकता था। लेकिन उसकी जिंदगी में एक खालीपन था—सब उसे उसकी दौलत के लिए पसंद करते थे, उसकी सादगी के लिए नहीं।
दूसरी तरफ सयाली थी, जो एक मध्यमवर्गीय परिवार से थी। बचपन में एक कार एक्सीडेंट में उसने अपने पैरों की ताकत खो दी थी। वह व्हीलचेयर पर थी, लेकिन उसकी आंखों में गजब की चमक और चेहरे पर हमेशा एक प्यारी मुस्कान रहती थी। वह एक अनाथालय में बच्चों को पेंटिंग सिखाती थी।
पहली मुलाकात
एक दिन आरव को अपनी कंपनी के चैरिटी प्रोजेक्ट के लिए उसी अनाथालय जाना पड़ा। वहां उसने सयाली को देखा। वह जमीन पर बैठी (अपनी व्हीलचेयर से उतरकर) बच्चों के साथ रंगों से खेल रही थी। उसके चेहरे पर लगा नीला रंग उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रहा था।
आरव उसे देखता रह गया। उसने आज तक इतनी शुद्ध खुशी किसी के चेहरे पर नहीं देखी थी। जब आरव उसके पास गया, तो सयाली ने बिना किसी हिचकिचाहट के कहा, "साहब जी, हाथ मत मिलाना, वरना आपके महंगे कोट पर रंग लग जाएगा!"
आरव मुस्कुराया और अपना कोट उतारकर बाजू में रख दिया। वह जमीन पर सयाली के सामने बैठ गया और बोला, "रंगों से डर नहीं लगता, बेरंग जिंदगी से लगता है।"
दिल का रिश्ता
अगले कुछ महीनों में आरव बहाने ढूंढ-ढूंढ कर सयाली से मिलने जाने लगा। उसे सयाली की व्हीलचेयर नहीं, बल्कि उसकी सोच और उसका हौसला दिखने लगा। आरव ने महसूस किया कि सयाली भले ही चल नहीं सकती थी, लेकिन वह उसे उड़ना सिखा रही थी।
एक शाम, समंदर के किनारे बैठे हुए आरव ने अपने दिल की बात कही।
"सयाली, मैं अपनी पूरी जिंदगी तुम्हारे साथ बिताना चाहता हूँ।"
सयाली खामोश हो गई। उसकी आँखों में आँसू आ गए। उसने अपनी व्हीलचेयर की ओर इशारा करते हुए कहा, "आरव, तुम एक राजकुमार हो। दुनिया की कोई भी लड़की तुम्हारे पीछे मर मिटेगी। मैं तुम्हारे साथ चल भी नहीं सकती, लोग क्या कहेंगे?"
आरव ने सयाली के हाथों को अपने हाथों में लिया और बड़ी सादगी से कहा:
"सयाली, मुझे साथ चलने वाली नहीं, मेरा साथ देने वाली हमसफर चाहिए। दुनिया पैरों से चलती है, लेकिन रिश्ते दिल से निभाए जाते हैं। तुम मेरी कमजोरी नहीं, मेरी ताकत बनोगी।"
एक नई शुरुआत
आरव के घरवाले पहले तो इस रिश्ते के खिलाफ थे, लेकिन जब उन्होंने सयाली की सादगी और आरव की आँखों में उसके लिए सच्चा प्यार देखा, तो वे मान गए।
आरव ने सयाली के लिए दुनिया नहीं बदली, बल्कि सयाली ने आरव की दुनिया को और खूबसूरत बना दिया। आरव ने अपनी कंपनी के हर ऑफिस को "डिसेबिलिटी फ्रेंडली" बनाया ताकि सयाली जैसी और भी प्रतिभाएं आगे बढ़ सकें।
उनकी शादी शहर की सबसे चर्चित शादी थी, जहाँ आरव ने सयाली की व्हीलचेयर को फूलों से सजाया था। जब आरव उसे अपनी बाहों में उठाकर फेरे ले रहा था, तब वहाँ मौजूद हर इंसान की आँखों में आँसू थे और जुबां पर सिर्फ एक ही बात—"सच्चा प्यार सूरत या जिस्म नहीं, रूह देखता है।"

