रात रानी
रात रानी
यह कहानी एक ऐसी कली की है जो सूरज की रोशनी में नहीं, बल्कि चाँद की चाँदनी में मुस्कुराती है। इसका शीर्षक है— रात रानी: एक खामोश खुशबू।
रात रानी
शहर के शोर-शराबे से दूर एक पुराना बंगला था। उस बंगले के पिछवाड़े में एक कोने में रात रानी का एक घना पौधा लगा था। दिन भर वह पौधा बिल्कुल साधारण दिखता था—बेजान पत्तियाँ और छोटी-छोटी बंद कलियाँ। बाकी फूलों के पौधे जैसे गुलाब और गेंदा, सूरज की रोशनी में इतराते थे, लेकिन रात रानी चुपचाप अपनी बारी का इंतज़ार करती थी।
उस बंगले में 'दादी' रहती थीं। उनका मानना था कि रात रानी का फूल सिर्फ खुशबू नहीं देता, बल्कि वह उन लोगों को दिलासा देता है जो दिन की भागदौड़ से थक चुके होते हैं।
वह एक बेचैन रात थी...
एक रात, दादी का पोता, आर्यन, बहुत परेशान था। वह अपनी परीक्षा और भविष्य को लेकर इतना तनाव में था कि उसे नींद नहीं आ रही थी। वह टहलते हुए पिछवाड़े के बरामदे में आकर बैठ गया। हर तरफ अंधेरा था और सन्नाटा पसरा हुआ था।
तभी अचानक, हवा का एक झोंका आया। वह झोंका अपने साथ एक ऐसी जादुई और भीनी-भीनी खुशबू लाया कि आर्यन की बंद आँखें खुल गईं। उसने देखा, वही साधारण सा दिखने वाला रात रानी का पौधा अब सफेद, छोटे-छोटे तारों जैसे फूलों से लदा हुआ था।
अंधेरे की अपनी सुंदरता
आर्यन ने महसूस किया कि जब सारा संसार सो रहा है और सूरज की चकाचौंध गायब है, तब यह नन्हा सा फूल खिलकर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है। उसे दादी की एक बात याद आ गई:
"बेटा, हर फूल सूरज के लिए नहीं खिलता। कुछ फूल अंधेरे में इसलिए खिलते हैं ताकि वे दुनिया को बता सकें कि रात चाहे कितनी भी काली क्यों न हो, उसमें भी सुंदरता और महक छिपी होती है।"
आर्यन का मन शांत हो गया। उसे समझ आया कि उसकी जिंदगी का यह 'कठिन समय' (अंधेरा) भी उसे कुछ सिखाने और निखारने के लिए ही है। वह रात रानी की खुशबू को महसूस करते हुए गहरी और सुकून भरी नींद सो गया।
सीख
रात रानी हमें सिखाती है कि चमकने के लिए हमेशा शोर मचाने या धूप की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी शांत रहकर, अंधेरे में भी दूसरों का जीवन महकाया जा सकता है।
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