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रूही शाह🌘

Tragedy

4.5  

रूही शाह🌘

Tragedy

आस्तिक से नास्तिक

आस्तिक से नास्तिक

2 mins
6


अध्याय 1: अटूट विश्वास
आर्यन के दिन की शुरुआत मंदिर की घंटियों और मंत्रों से होती थी। उसे लगता था कि दुनिया में जो कुछ भी हो रहा है, उसके पीछे एक अदृश्य शक्ति का हाथ है। वह हर परीक्षा से पहले भगवान के सामने मत्था टेकता और हर असफलता को 'ईश्वर की इच्छा' मानकर स्वीकार कर लेता। उसके लिए श्रद्धा ही सबसे बड़ा तर्क था।
अध्याय 2: संदेह का बीज
बदलाव तब शुरू हुआ जब आर्यन ने विज्ञान और दर्शन पढ़ना शुरू किया। कॉलेज के दिनों में उसने दुनिया में फैली असमानता को करीब से देखा। उसने देखा कि:
 * एक मासूम बच्चा जो कभी किसी का बुरा नहीं कर सकता, वह गंभीर बीमारी से जूझ रहा है।
 * कट्टर अपराधी वैभव का जीवन जी रहे हैं, जबकि ईमानदार लोग दो वक्त की रोटी को तरस रहे हैं।
उसके मन में पहला सवाल उठा— "अगर ईश्वर सर्वशक्तिमान और दयालु है, तो वह इस अन्याय को होने ही क्यों देता है?"
अध्याय 3: तर्कों की कसौटी
आर्यन ने अपने गुरुओं और परिवार से ये सवाल पूछे। उसे जवाब मिले: "यह पिछले जन्मों के कर्म हैं" या "भगवान परीक्षा ले रहे हैं।" लेकिन आर्यन का जिज्ञासु मन अब इन जवाबों से संतुष्ट नहीं था। उसने डार्विन का विकासवाद पढ़ा, ब्रह्मांड की विशालता को समझा और जाना कि प्रकृति के नियम (Laws of Physics) किसी चमत्कार के मोहताज नहीं हैं। उसे समझ आया कि जिसे वह 'चमत्कार' समझता था, वह महज विज्ञान का एक अनसुलझा सिरा था।
अध्याय 4: मौन का बोध
एक रात, आर्यन ने घंटों प्रार्थना की कि उसे कोई एक छोटा सा संकेत मिले जो उसके डगमगाते विश्वास को थाम ले। लेकिन सामने सिर्फ सन्नाटा था। उस सन्नाटे में उसे एहसास हुआ कि डर और असुरक्षा ने ही इंसान को ईश्वर की कल्पना करने पर मजबूर किया है।
उसने पाया कि:
 * नैतिकता के लिए किसी स्वर्ग या नर्क के डर की जरूरत नहीं है।
 * मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है।
 * जिम्मेदारी खुद की है, किसी 'किस्मत' की नहीं।
निष्कर्ष: एक नई शुरुआत
आर्यन अब मंदिर नहीं जाता, न ही वह किसी चमत्कार की उम्मीद करता है। वह अब 'नास्तिक' कहलाता है, लेकिन वह पहले से कहीं ज्यादा शांत है। अब वह लोगों की मदद इसलिए नहीं करता कि पुण्य मिलेगा, बल्कि इसलिए करता है क्योंकि वह एक इंसान है।
उसने ईश्वर को खो दिया, पर खुद को पा लिया।
> "सत्य को खोजने के लिए पहले विश्वास की जंजीरों को तोड़ना पड़ता है।"

क्या आप चाहेंगे कि मैं इस कहानी के किसी विशेष हिस्से (जैसे आर्यन और उसके पिता के बीच का संवाद) को विस्तार से लिखूँ?


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