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रूही शाह🌘

Action

4.5  

रूही शाह🌘

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यादों का कारवां

यादों का कारवां

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यह एक दिल को छू लेने वाली कहानी है जो बिछड़ने के बाद के उस खालीपन को दर्शाती है, जहाँ रातें सबसे लंबी लगने लगती हैं।
अधूरी रातें: उसके जाने के बाद
शहर की शोर-शराबे वाली गलियां अब शांत हो चुकी थीं, लेकिन आर्यन के कमरे में सन्नाटा चीख रहा था। घड़ी की सुई 12:00 बजा चुकी थी। उसने एक बार फिर करवट बदली, तकिए को ठीक किया, और आँखें बंद करने की कोशिश की। लेकिन नींद? वह तो जैसे उस आखिरी विदा के साथ ही कहीं दूर चली गई थी।
यादों का कारवां
जब वह साथ थी, तो रातें छोटी लगती थीं। बातों-बातों में कब सुबह की पहली किरण खिड़की से झाँकने लगती, पता ही नहीं चलता था। उसकी हँसी, उसकी वो छोटी-छोटी बातें और भविष्य के वो बड़े-बड़े सपने—सब कुछ अब यादों के एक बक्से में बंद था। आर्यन ने मेज पर रखी उस अधूरी डायरी को देखा जिसे उन्होंने मिलकर शुरू किया था।
> "अकेलापन वह नहीं होता जब आपके पास कोई न हो, अकेलापन वह होता है जब आपके पास सब कुछ हो, बस वो एक इंसान न हो जिससे आप सब कुछ बांटना चाहते थे।"

वो बेचैन करने वाला खामोश कोना
कमरे के उस कोने में रखी खाली कुर्सी अब उसे काटने को दौड़ती थी। आर्यन अक्सर उठकर बालकनी में चला जाता। ठंडी हवा के झोंके उसे सहलाते तो थे, पर उसकी रूह तक नहीं पहुँच पाते थे। उसे अब भी लगता कि शायद फोन की लाइट जलेगी और उसका एक मैसेज आएगा— "सो गए क्या?" लेकिन स्क्रीन काली थी। उसके जाने के बाद समय जैसे थम सा गया था, पर यह रातें... ये रातें तो जैसे खत्म होने का नाम ही नहीं लेती थीं।
नया सवेरा, नई उम्मीद
कई हफ्तों की इस कशमकश के बाद, आर्यन ने समझा कि उसे खुद के लिए जीना होगा। उसने अपनी उन भावनाओं को कागज पर उतारना शुरू किया। जो शब्द वह उससे नहीं कह पाया, वो अब उसकी कहानियों का हिस्सा बनने लगे। नींद अब भी जल्दी नहीं आती थी, पर अब उस अंधेरे में खौफ नहीं, बल्कि एक ठहराव था।
उसे एहसास हुआ कि उसके जाने के बाद भी, उसका एक हिस्सा आर्यन के शब्दों में हमेशा जिंदा रहेगा।



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