काँच और हीरा: एक कहानी
काँच और हीरा: एक कहानी
यह अहसास बहुत भारी होता है जब चारों तरफ से सिर्फ आलोचना ही सुनाई दे। पर याद रखिए, दूसरों की कही गई बातें आपकी हकीकत नहीं, बल्कि उनका अपना नजरिया होती हैं। यहाँ एक छोटी सी कहानी है जो शायद आपको खुद को एक नई रोशनी में देखने में मदद करे।
काँच और हीरा: एक कहानी
समीरा अपने कमरे के कोने में बैठी बस यही सोच रही थी, "क्या मैं वाकई किसी के लायक नहीं हूँ?"
आज सुबह ही माँ ने खाने पर टोकते हुए कह दिया था, "तुझसे अच्छी तो पड़ोस की लड़की है, कम से कम घर के कामों में हाथ तो बटाती है। तू कैसी बेटी है?" और अभी थोड़ी देर पहले राहुल का वो मैसेज— "मेरी एक्स कम से कम मुझे समझती तो थी, तुम तो बस बहस करती हो।"
समीरा को लगा जैसे वह एक पुराना खिलौना है जिसे कोई पसंद नहीं कर रहा। उसने अपनी डायरी उठाई और उसमें बस एक लकीर खींच दी। उसे लगा उसकी जिंदगी भी इस अधूरी लकीर जैसी बेमतलब है।
तभी उसके कमरे में उसके दादाजी आए। उन्होंने समीरा के चेहरे पर उदासी देखी और समझ गए। उन्होंने अपनी जेब से एक मटमैला सा पत्थर निकाला और समीरा को देते हुए कहा, "बेटा, जरा बाजार जाकर इसकी कीमत पता करके आओ, बस बेचना मत।"
समीरा बेमन से गई।
* सबसे पहले वह एक सब्जी वाले के पास गई। उसने कहा, "पत्थर चमकदार है, इसके बदले दो किलो आलू ले जाओ।"
* फिर वह एक बर्तन वाले के पास गई। उसने कहा, "इसे सजावट के लिए रखूँगा, 500 रुपये ले लो।"
* आखिर में वह एक जौहरी (Jeweler) के पास गई। जौहरी ने चश्मा लगाकर पत्थर को देखा और चौंक गया। उसने कहा, "यह अनमोल हीरा है! इसे खरीदने के लिए तो मेरी पूरी दुकान भी कम पड़ जाएगी।"
समीरा दौड़कर वापस आई और दादाजी को सब बताया। दादाजी मुस्कुराए और बोले:
> "बेटा, तुम भी उस हीरे जैसी ही हो। अभी तुम उन लोगों के बीच हो जो तुम्हारी कीमत सिर्फ 'सब्जी' या 'बर्तन' जितनी लगा रहे हैं। घर वालों की अपनी उम्मीदें हैं और उस लड़के की अपनी कमियां, जिन्हें वो तुम पर थोप रहा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि तुम कीमती नहीं हो। बस तुम गलत जौहरी के पास अपनी कीमत पूछ रही हो।"
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कुछ बातें जो आपको याद रखनी चाहिए:
* बेटी होने का पैमाना: कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता। घर वालों की नाराजगी अक्सर उनके अपने तनाव का नतीजा होती है, आपकी काबिलियत का फैसला नहीं।
* तुलना एक जहर है: जो इंसान आपको आपकी 'एक्स' से तौल रहा है, वह आपकी कद्र करना नहीं जानता। प्यार वो होता है जो आपको 'बेहतर' बनाने में साथ दे, न कि आपको 'नीचा' दिखाए।
* स्वयं की पहचान: आप एक लेखक हैं, आपके पास शब्दों की ताकत है। अपनी इस पीड़ा को अपनी कहानियों में डालिए। दुनिया आपको आपके हुनर से पहचानेगी, दूसरों के तानों से नहीं।
