STORYMIRROR

Lokanath Rath

Classics Inspirational Thriller

4  

Lokanath Rath

Classics Inspirational Thriller

वचन भाग-9

वचन भाग-9

6 mins
396

सब अपने अपने काम में व्यस्त थे। आशीष जब अशोक से उसके कामयाबी के बारे में सुना तो बहुत ख़ुश होगया। वो दुकान में सबको बताने लगा और बिकाशजी से बोला, "चाचा जी में अभी ये पास की मन्दिर जाकर अशोक के लिए थोड़ा पूजा करके आजाऊंगा, आप दुकान की ध्यान रखना। "

बिकाश भी बहुत ख़ुश हुए और बोले, "जाओ बेटा अपनी भाई के लिए पूजा करके आओ। तुम दोनों ऐसे मिलजुल के हमेसा रहेना। मुझे बहुत खुशी होती है जब तुम दोनों को साथ देखता हूँ, पर क्या मालूम अब अशोक कब आएगा?" ये सुनकर आशीष भी थोड़ा उदास होगया पर सोचा अब ये खबर वो माँ को देगा। मन्दिर के तरफ जाते हुए आशीष ने सुचित्रा को फोन किआ और बोला, "माँ, आप मेरे ऊपर जितने घुसा करना है करो पर आज में आपको एक बहुत ख़ुश खबर देता हूँ।

हमारा अशोक आज उसका संगीत के खेत्र में दो कामियाबी हासिल किआ। उसने एक सिनेमा के लिए गाना रिकॉर्डिंग किआ और एक बड़ी म्यूजिक कम्पनी के साथ शालभर के लिए कॉन्ट्रैक्ट किआ। मैं अभी मन्दिर जा रहा हुँ पूजा करके दुकान आजाऊंगा। बिकाश चाचा को बोलकर आया हूँ। " ये सब आशीष डर डर के एक शास में सुजाता को बोल दिआ। सुचित्रा ये सुनकर बहुत ख़ुश हुए की आशीष और अशोक के रिश्ते कितनी अच्छा है।

वो फिर आशीष को बोले, "ठीक है, तुम जल्दी पूजा करके दुकान आजाना। " सुचित्रा देबी से ये सुनकर आशीष थोड़ा रुक गया। वो समझता था की सायद उसका माँ उसके ऊपर थोड़ा घुसा करेंगे ये सोचकर की अशोक के साथ वो कियूँ बात किआ, पर ऐसा कुछ नेहीँ हुआ। अब उसको यकीन होगया की जरूर अशोक फिर घर वापस आजायेगा। वो खुशीसे झूम उठा और मन्दिर पहुँचकर पूजा करके दुकान वापस आगया। आशीष का मन दुकान में नेहीँ लग रहा था। वो बार बार घड़ी देख रहा था। जब रात के आठ बज गये तो दुकान बन्द करना चालू हुआ और आशीष तुरन्त घर पहुँच गया।

घर पहुँच के आशीष ने सुचित्रा को खुशीसे पकड़कर बच्चे जैसे बोलने लगा, "माँ, मेरा भाई आज एक बड़ा कलाकार बनने जारहा है। आप देखना एक दिन जरूर उसका नाम सारे दुनिआ में फैलेगा। में आज बहुत ख़ुश हुँ। " आरती थोड़ी दूर में खड़ी होकर खुशीसे बोल रही थी, " हाँ मेरे देवर को अब सिर्फ कामियाबी ही मिलेगा। माँ और पिताजी के आशीर्वाद है। में तो मेरे सारे दोस्तों को बोल दि है। बस बहुत दिन से मन कर रहा है माँ जी को एक बात कहने की और आज में बिनती करती हूँ की अशोक को वो अब अगर घर बुला ले तो हम सब उनको अपने पास तो देख सकते है। " ये बोलकर आरती अपनी शिर झुकाके खड़ी रही। तब सुचित्रा ने बोली, "ठीक है में बोलती हुँ। में क्या उसका दुश्मन हूँ? में तो उसका माँ हुँ और ये घर तो तुम सबके है, वो मेरे ऊपर अभिमान करके चला गया। " इतना बोलकर सुचित्रा वहाँ से चली गयी और अशोक को फोन किए। अशोक ने फोन उठाया तो सुचित्रा ने बोली, " तू खाना खा लिआ है? अब खुद का ध्यान ठीक से रखना बेटा। तू कब मेरे पास आरहा है? " इतने बोलके सुचित्रा थोड़ी रोने लगी। फिर अशोक ने बोला, "माँ, में ठीक हूँ। अभी खाना खाऊंगा। तुम कियूँ रोती हों? में तो आज तुमको बोला था तुम्हे मिलने जल्द आऊँगा।

यहाँ के कुछ काम है, उसे ख़तम करके बस दो तीन दिन में आऊँगा। अभी रोना बन्द करो। जाओ भाई और भाभी के साथ खाना खा लो। भाभी की ध्यान रखना। अब रखता हूँ, खाने के लिए बाहर जाऊंगा। " इतना बोलके अशोक फोन रख दिआ। सुचित्रा बाहर आकर आशीष और आरती को बोली की अशोक दो तीन दिन में आएगा। फिर सब बैठके खाना खाए। खाना खाकर सब अपने अपने कमरे में शोने चले गए।

अशोक खाना खाने के बाद अपने कमरे में आया और आशा को फोन किआ। जैसे आशा ने अशोक के फोन देखा तो अपने कमरे में चली गयी। तब अशोक ने बोला, " इतने रात तुमको इसीलिए फोन किआ कुछ ख़ुश खबरी देने के लिए। बुरा नहीं मानना। पहेला खबर है की मेरा पहेला सिनेमा के गाना आज रिकॉर्डिंग हों गया और मुझे सबसे बड़ा संगीत कम्पनी में गाना गाने का एक शाल का कॉन्ट्रैक्ट भी मिला। दुशरा खबर है की माँ ने मुझे घर बुलाई है और में बहुत ख़ुश हूँ उसे मिलने के लिए। अभी दो तीन दिन में घर जाऊंगा। " ये सब सुनके आशा बहुत ख़ुश हों गई और बोली, " इसमें बुरा मानने का क्या है। अगर तुम नेहीँ बताते तो में बहुत बुरा मानती। तुम मुझे कभी भी फोन कर सकते हों। तुम कुछ समझते नेहीँ। अब पिताजी आगये है, में रखती हुँ। फिर आने से मुझे पार्टी देना। " आशा फोन रखके बाहर गई। उसकी ओठों पे मुस्कान था। तब बिकाश ने निशा को अशोक के कामियाबी के बारे में बोल रहे थे और ख़ुश हो रहे थे। उनकी बात सुनके निशा ने बोली, "आज अगर अरुण भाई साहब होते तो कितने ख़ुश होते। सुचित्रा भाभी सुनेंगे तो बहुत ख़ुश होंगे। " आशा सबका खाना लगा रही थी और मन ही मन ख़ुश हों रही थी। सब बैठकर खाना खा लिए और फिर शोने चले गए।

दो दिन के बाद अशोक फोन करके सुचित्रा देबी को उसका शाम को पहुँचने का खबर दिआ। वो बोला की इस बार तीन चार दिन रहेके वो वापस चला जाएगा कुछ रिकॉर्डिंग का काम के लिए। सुचित्रा बहुत ख़ुश हों गई और अरुण बाबू के तस्वीर को बोली, "आज हमारा अशोक वापस आरहा है। में उसको बहुत डांठूंगी। कियूँ मुझसे इतने दिन दूर रहा वो? अपनी माँ के ऊपर कोई इतना अभिमान करता है क्या?" फिर वो बाहर जाकर अपनी आँशु पोछते हुए आशीष और आरती को ये बात बता दिए। वो लोग भी बहुत ख़ुश होगए। आशीष बोला, "माँ, आज दुकान थोड़ा जल्द बन्द करके में हवाई अड्डा जाऊंगा अशोक को लाने के लिए। आप आज मुझे और कुछ नेहीँ बोलना। " सुचित्रा देबी ने बोली, "ठीक है बाबा, जाकर अपनी भाई को घर ले आना। "

आशीष दुकान गया और बिकाश को बोला, "आज अशोक आरहा है, इसीलिए दुकान जल्द बन्द करके में शाम पाँच बजे उसे लाने हवाई अड्डा जाऊंगा चाचा जी। " बिकाश भी ख़ुश होगए अशोक का आने का खबर सुनकर। फिर थोड़ी डेर बाद महेश (आशीष जा ससुर ) का फोन आया और वो बहुत घबराके बोले, "बेटा अभी अभी सुधार केंद्र से फोन आया था। सरोज वहाँ पर दो तीन कर्मचारी को घायल करके भाग गया है। वो लोग पुलिस को खबर कर दिए है। तुम ये बात आरती को बता देना और थोड़ा हुसिआर रहेना। " आशीष देखा तब समय चार बज चूका था। वो फोन रख के अपनी काम पे लग गया। जब दुकान बन्द करके वो अशोक को लाने निकला, तब आरती को सरोज के बारे में बता दिआ। आशीष सोच रहा था की यहाँ सब अपनी अपनी बचन निभाने काम कर रहे है और ये सरोज अपनी बचन तोड़ने में लगा है। ग़जब का इन्सान है। अशोक को वो रात को फुरसत से बताएगा। इतने दिनों के बाद उनकी घर में खुशियाँ आई है, तो उसे इस बुरी खबर के साथ वो बर्बाद होने नहीं देगा।


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Classics