उर्वशी
उर्वशी
उर्वशी एक छोटे से कस्बा की पढ़ी-लिखी और होनहार लड़की थी। वह मैनेजमेंट कोर्स करने के बाद जॉब करने मुंबई गई। उसके लिए मुंबई में सब कुछ नया था।जिंदगी का एक नया अनुभव। उसे एडजस्ट होने में 4 -5 दिन लगे, वैसे कंपनी की तरफ से उसे फ्लैट मिला था। भले ही मुंबई एक घनी आबादी वाला शहर है। हर वक्त चहल पहल रहती है, बहुत ही चकाचौंध वाला शहर है। लेकिन एक फ्लैट में एक छोटे से कस्बा की लड़की के लिए अकेले रहना बहुत मुश्किल था।उसे अपने घर की बहुत याद आती थी लेकिन ऑफिस का बहुत सारा काम उसके अकेलेपन को दूर कर देता था।
एक दिन उसके बॉस सौरव ने एक प्रेजेंटेशन रेडी करने को कहा और साथ में ऑफिस कलीग देवा को असिस्ट करने के लिए कहा। उर्वशी ने देवा को साथ लेकर प्रेजेंटेशन पर काम करना प्रारंभ कर दियाकाफी मेहनत के बाद दोनों ने प्रेजेंटेशन तैयार किया। जिसे देखकर उनका बॉस सौरव बहुत प्रभावित हुआ और उन दोनों को प्रमोट करने का आश्वासन दिया।
एक दिन ऑफिस में देवा ने उर्वशी से कहा:-"टॉकीज में मूवी लगी है "प्यार तो होना ही था"चलो आज शाम को मूवी देखने चलते हैं।"यह सुनकर वह तुरंत राजी हो गई फिर वह दोनों शाम को पिक्चर देखने गए।उसके बाद अक्सर वह दोनों डिनर के लिए शहर के अलग-अलग रेस्टोरेंट जाने लगे, और होली डे वाले दिन दोनों वॉटर वर्ल्ड जाते थे। अब तो हर संडे को मूवी देखना उनकी दिनचर्या में शामिल हो गया था।ऑफिस में सभी को लगने लगा था कि वह एक दूसरे के करीब आ रहे हैं, क्योंकि उनमें से एक ऑफिस नहीं आता तो दूसरे का काम में मन नहीं लगता था।
एक दिन देवा ऑफिस नहीं आया। उर्वशी उसका इंतजार कर रही थी। फोन लग नहीं रहा था । बॉस ने कुछ काम बताया था इसलिए उसे देवा की जरूरत पड़ रही थी।तभी बॉस के केबिन से आवाज आई:-
"उर्वशी....कम टू माई केबिन"
"हां सर आई"
उर्वशी:- "सर बुलाया आपने !"
सौरव:-" कल तुमको जो टास्क दिया था। क्या हुआ उस टास्क का ?"
उर्वशी:- "अभी थोड़ा टाइम लगेगा सर...बस आधे घंटे में कंप्लीट हो जाएगा।"
सौरव:- "सुनो...आज डिनर के लिए तुमको मैं अपने घर पर इनवाइट कर रहा हूं....आओगी ना.....!"
उर्वशी:- "सर...अब... क्या...बताऊं...(फुसफुसाते हुए)"
सौरव (बॉस)- "अब कोई एक्सक्यूज नहीं तुमको आना ही होगा। जब तुम मेरी मां के हाथ का खाना चखोगी तो तुमको बहुत अच्छा लगेगा।"
उर्वशी:- "ओके सर" तब तो मैं जरूर आऊंगी।"
फिर शाम को उर्वशी बॉस के घर पहुंची।उसने डोर बेल बजाई
अंदर से आवाज आई:- "कौन है?"
उर्वशी:- "जी मैं हूं उर्वशी।"
सौरव:- "ओके...ओके..आई एम कमिंग ।"
सौरव ने उर्वशी को देखकर कहा:- "आइए...आइए...तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था ।"
सौरव:- "मां यह है उर्वशी....मेरे ऑफिस में है।आपको बताया था ना एक दिन....यह वही उर्वशी है ।"
फिर उर्वशी की तरफ देखते हुए सौरव ने कहा:- "उर्वशी यह मेरी मां है, मैं अपनी मां के साथ ही रहता हूं ।मां की हेल्प करने के लिए एक मेड को रखा है ।"
उर्वशी ने मां के पैर छूते हुए पूछा:- "मां जी आप कैसी हो ? आपसे मिलकर बहुत अच्छा लग रहा है ।"
उर्वशी का ऐसा व्यवहार देखकर मां को बहुत अच्छा लगा। बहुत प्रभावित हुईं । बोली "बिटिया तुम बहुत प्यारी लग रही हो। मुझे भी अपने बेटे के लिए तुम्हारी जैसी लड़की की तलाश है।"
मां को बीच में टोकते हुए सौरव ने कहा:-" मां आप भी ना कहीं भी शुरू हो जाती हो । यह सब बात बाद में कर लेना ।आप डिनर तैयार करवाइए, बहुत भूख लगी है।"
मां बोली:- "ठीक है बेटा तैयार करती हूं डिनर, तुम लोग बात करो।"
लेकिन उर्वशी भी मां के साथ किचन में चली गई और बोली :-" मां जी मैं भी आपकी हेल्प करूंगी।"
मां ने कहा:- "तुम रहने दो, आज के दिन तुम हमारी मेहमान हो ।"
उर्वशी:-" नहीं मां जी, आप अकेले नहीं करोगे मैं भी आपकी सहायता करूंगी।"
मां ने हंसते हुए कहा:- "चलो कोई तो आ गया मेरे घर मेरी हेल्प करने। अब तुम हमेशा के लिए आ जाओ मेरे घर। मेरे बेटे से शादी कर लो। क्यों बिटिया तुमको पसंद है ना मेरा बेटा !क्या सोच रही हो ?तुम मुझे बहुत अच्छी लगी इसलिए अपने मन की बात कहने से खुद को रोक नहीं पायी, मेरे घर को अब तुम ही संभाल सकती हो।"
मां:-" चलो बिटिया खाना बन गया।पता ही नहीं चला बातों बातों में....कब खाना बन गया।अब आओ मेरे साथ.. तुमको कुछ दिखाती हूं।"
उर्वशी:- "ठीक है मां जी चलो, "
(उत्सुकता से पूछते हुए) "क्या दिखाओगी मां ??"
मां:-"आओ ना...."
उर्वशी मां के पीछे पीछे चलने लगी।
मां सौरव के रूम के पास पहुंची और उसने दरवाजा खोलकर रूम की लाइट ऑन की। रूम की लाइट ऑन होते ही उर्वशी ने देखा कि रूम में चारों तरफ केवल उसकी ही तस्वीर लगी हुई हैं।उर्वशी ने आश्चर्यचकित होते हुए कहा:-" मां जी.. इस कमरे में चारों तरफ मेरी तस्वीर क्यों लगाई है ?"
मां ने कहा:-" मेरा बेटा सौरव तुमसे बहुत प्यार करता है।वह हर वक्त तुम्हारी तस्वीरें देखता रहता है। सुनो बिटिया जब से उसने तुमको देखा है तब से वह खोया खोया रहता है। हर वक्त तुम्हारी ही बातें करता रहता है।"
उर्वशी ने कहा:-" लेकिन वह मेरे बॉस हैं।"
मां:- "कोई बात नहीं है घर की बॉस तुम बन जाओ।"
(फिर दोनों हंसते हुए रूम से बाहर आ जाते हैं)
तभी मेड बुलाती है:-"मां जी खाना डाइनिंग टेबल पर लगा दिया है।"
मां:- "अच्छा ठीक है....आते हैं....आते हैं।"
फिर सभी खाना खाने के लिए डाइनिंग टेबल पर आ जाते हैं।
मां:-" सौरव मैंने तुम्हारा रूम उर्वशी को दिखा दिया है। तुमने जो इसकी तस्वीरें लगाई है, उर्वशी ने सब देख लीं।"
सौरव:-" क्या मां....आप ही ना.... क्यों दिखा दिया मेरा रूम?क्या सोचगी उर्वशी मेरे बारे में ?आपको भी चैन नहीं है मां ।"
उर्वशी स्माइल करते हुए:-" और मेरे बॉस, आप को भी चैन नहीं पड़ता है। मुझे पता ही नहीं चला आपने मेरे फोटो कब खींच ली। "
मां:- "बिटिया उर्वशी यह बहुत ही छुपा रुस्तम है। जितना सीधा दिखता है ना...उतना है नहीं ।बस इसे लड़की को प्रपोज करना नहीं आता है।"
उर्वशी:- (मुस्कुराते हुए) "अच्छा जी, तो यह बात है...अब समझ में आया।सर जब आप किसी को प्रपोज नहीं कर सकते हो तो प्यार का नाटक क्यों करते हो।"
सौरव:- कोई बात नहीं जनाब अब प्रपोज किए देता हूं।
"उर्वशी.. .डू यू मैरी मी"
उर्वशी शर्माते हुए:- "क्या सर आप भी ना, बहुत अच्छा मजाक कर लेते हो।"
सौरव:- "मुझे मजाक करना नहीं आता। मैं तुम्हें बहुत चाहता हूं और शादी करना चाहता हूं।हां...अगर तुमको पसंद नहीं तो मैं जबर्दस्ती नहीं करूंगा।"
उर्वशी:-" सर मुझे थोड़ा वक्त चाहिए शादी के संबंध में आपको और मां जी को मेरे माता-पिता से बात करनी पड़ेगी। क्योंकि मेरी शादी के संबंध में वही निर्णय करेंगे।"
मां :- "बहुत ही सुंदर विचार हैं बिटिया के।बहुत ही संस्कारी है शादी करके जिस घर में भी जाएगी उसे स्वर्ग बना दोगी।"
सौरव:- ओके..."टेक योर टाइम" आई हैव नो प्रॉब्लम।
सौरव:- अब चलो उर्वशी बहुत देर हो गई। रात के 12:00 बज चुके हैं। मैं तुमको फ्लैट पर ड्रॉप कर देता हूं।
मां:- बहुत रात हो गई है आज उर्वशी हमारे घर पर ही रुक जाएगी। रात को उर्वशी मां के कहने पर रुक जाती है। दूसरे दिन सुबह सौरव और उर्वशी एक ही कार में ऑफिस के लिए निकलते हैं।
जब दोनों ऑफिस पहुंचे तो दोनों को एक साथ आते हुए देवा ने देख लिया। दोनों को एक साथ देख कर देवा को अच्छा नहीं लगा।
उर्वशी ऑफिस में आकर अपनी चेयर पर बैठ गई। उसने देवा की तरफ देखा और बोली:- क्या हुआ??
आज परेशान दिख रहे हो!
देवा ने जवाब दिया:- तुम्हें क्या लेना देना है मेरी परेशानी से।
उर्वशी बोली:- ऐसा क्यों कह रहे हो?
देवा:- कहां थी तुम पूरी रात?
मैं रात भर तुम्हारे फ्लैट के बाहर इंतजार करता रहा। और तुम्हारा कोई अता-पता नहीं, फोन किया तो फोन नहीं लग रहा था।
उर्वशी:- मैं तो कल बॉस के घर गई थी डिनर पर। अधिक रात होने के कारण उनकी मां ने मुझे अपने घर पर ही रोक लिया इसलिए अपने फ्लैट पर नहीं आ पाई।
देवा:- चलो ठीक है मुझे काम करने दो।
उर्वशी:- तुम अपसेट क्यों हो?
देवा:- नहीं...मैं अपसेट नहीं हूं ।
उर्वशी:- फिर तुम मेरे से नजरें क्यों चुरा रहे हो।
देवा:- मुझे अच्छा नहीं लगता, तुम किसी और के साथ कहीं भी जाओ।
उर्वशी:- लेकिन तुम्हें इससे क्या प्रॉब्लम है?मैं किसी के साथ आऊं या ना जाऊं।यह मेरी जिंदगी है। मैं अपनी जिंदगी में हर निर्णय खुद लेती हूं ।
देवा बहुत हिम्मत करते हुए बोला:-"मैं तुमसे प्यार करता हूं, शादी करना चाहता हूं।"
उर्वशी :- देखो देवा हम तुम इस ऑफिस में एक अच्छे दोस्त हैं और एक अच्छे दोस्त की तरह ही रहेंगे।अब तुम अपने काम पर ध्यान दो। कल मीटिंग है मुझे सौरव सर के साथ दादर जाना होगा। इसलिए मुझे अभी बॉस के साथ बैठकर अगली प्रेजेंटेशन तैयार करनी है।

