STORYMIRROR

अख़लाक़ अहमद ज़ई

Classics

3  

अख़लाक़ अहमद ज़ई

Classics

उहापोह

उहापोह

1 min
199

उसने मुझसे कहा --

"इस समय मैं उहापोह की स्थिति में हूँ।" 

"क्यों ?" सवालिया निशान लिए मैंने पूछा। 

"मुझे अपनी एक पुस्तिका प्रकाशित कराना है। इसके लिए टेंडर आमंत्रित करूं या सीधा प्रकाशक से संपर्क करूं?" 

इस बार सवालिया निशान लिए वह मेरे सामने खड़ा था और मैं निरुत्तर था।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi story from Classics