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Ashish Kumar Trivedi

Abstract


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Ashish Kumar Trivedi

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तिरंगे का पांचवा रंग

तिरंगे का पांचवा रंग

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कॉलेज के बाद निकिता ने अपनी सहेली वैष्णवी से कहा,

"मेरे साथ मार्केट चलेगी ?"

"चलूँगी... क्या कोई खास शॉपिंग करनी है ?"

"राखी का सामान खरीदना है।"

निकिता की बात सुनकर वैष्णवी को आश्चर्य हुआ। उसने कहा,

"राखी में तो अभी बहुत दिन हैं। राखी शॉपिंग इतनी जल्दी क्यों ?"

निकिता ने कहा,

"सामान खरीदूँगी। फिर राखियां बनाऊंँगी। उन्हें भेजूंँगी। इन सब में वक्त लगेगा।"

"तू क्या राशियों का बिजनेस करने वाली है ?"

"बिजनेस के लिए नहीं, अपने भाइयों के लिए बनाऊंँगी राखियां।"

वैष्णवी ने फिर आश्चर्य से पूँछा,

"मैंने तो सुना था तुम्हारा एक ही भाई है। तो बाकी किन भाइयों के लिए भेजोगी।"

"उन सभी भाइयों के लिए जो मेरे भाई के साथ सरहद पर तैनात हैं।"

निकिता राखी का सामान लेकर घर पहुँची तो पता चला कि उसके भाई रणवीर का फोन आया था। इस रक्षाबंधन पर वह घर आ रहा था। यह जानकर निकिता बहुत खुश हुई। उसने अपने बाकी भाइयों को भेजने के लिए राखियां बनानी शुरू कर दीं। समय पर राखियां तैयार करके उसने उन्हें डाक से भेज दिया। अपने भाई रणवीर के लिए उसने एक राखी बना कर अलग रख ली‌।

निकिता बेसब्री से राखी पर अपने भाई के आने का इंतजार कर रही थी। उसने एक लंबी लिस्ट बना रखी थी। अपने भाई से वह क्या गिफ्ट लेगी। उसके साथ कहाँ कहाँ घूमने जाएगी। कौन सी फिल्म देखेगी। उसकी लंबी लिस्ट देखकर उसकी मां ने कहा,

"रणवीर कुछ दिनों के लिए ही आ रहा है। तुम ही उसका सारा समय ले लोगी। हम लोगों से बात नहीं करने दोगी उसे।"

निकिता ने कहा,

"मम्मी भैया राखी पर आ रहे हैं। राखी भाई बहन का त्यौहार है। इसलिए मेरा हक ज्यादा है। मुझसे जो वक्त बच जाए उसमें आप लोग बात कर लीजिएगा।"

उसकी मां ने समझाते हुए कहा,

"बड़े दिनों के बाद वह कुछ ही समय के लिए आ रहा है। उसे अधिक परेशान मत करना।"

निकिता ने अपनी मां के गले में बाहें डालकर कहा,

"खूब करूँगी। मुझे भी इसका मौका कहाँ मिलता है।"

निकिता की मां ने हंसकर कहा,

"ठीक है मैं तुम दोनों भाई बहन के बीच में नहीं बोलूँगी।"

राखी का त्यौहार पास आ रहा था। लेकिन भारत का अपने पड़ोसी देश चीन के साथ तनाव बढ़ रहा था। राखी से एक हफ्ते पहले रणवीर का फोन आया कि उसकी छुट्टी कैंसिल हो गई है। वह राखी पर नहीं आ पाएगा। 

यह खबर मिलते ही निकिता बहुत दुखी हो गई। उसके पिता ने उसे समझाया,

"तेरे भाई ने देश की रक्षा का प्रण लिया है। उस पर सारे देश की हिफाजत का दायित्व है। ऐसे में अपना कर्तव्य छोड़कर वह तेरे पास कैसे आ सकता है।"

अपने पिता की बात सुनकर निकिता ने कहा,

"ठीक है पापा मैं नहीं रोऊँगी। अपनी राखी संभाल कर रखूंँगी। जब भी भैया आएंगे उन्हें बांध दूँगी।"

राखी के दिन निकिता की अपने भाई और उसके साथियों से बात हुई। उन्होंने उसे बताया कि वह सब बॉर्डर पर अपनी पोस्ट पर जा रहे हैं। सबने उसे राखी की की बधाई दी। सबसे बात करके निकिता बहुत खुश हुई। 

निकिता के मामा उसकी मां से राखी बंधवाने आए थे। साथ में उनका दस साल का बेटा भी आया था। निकिता ने उनके लिए भी एक राखी बनाई थी। अपनी मां के साथ साथ उसने भी वह राखी अपने ममेरे भाई के हाथ में बांध दी। पूरे दिन भर अपने भाई के साथ बातें करती रही। 

उसके मामा के जाने के बाद निकिता को अपने भैया रणवीर की बहुत याद आ रही थी। ना जाने क्यों उसका मन घबरा रहा था। उसने रणवीर के लिए रखी हुई राखी निकाली। अपने भाई की तस्वीर के पास आई और भगवान से प्रार्थना की कि उसका भाई सलामत रहे। 

वह राखी लेकर अपने कमरे में चली गई। उसे अपने सीने से लगाए वह सो गई।

उसके पिता ने आकर उसे जगाया। वह बहुत दुखी लग रहे थे। निकिता ने घड़ी देखी। सुबह के सवा चार बजे थे। अपने पिता की स्थिति देखकर निकिता घबरा गई। उसने पूँछा,

"क्या बात है पापा ? आप इतने परेशान क्यों हैं ? मम्मी कहांँ हैं ? मम्मी ठीक तो हैं ?"

उसके पिता ने रोते हुए कहा,

"निकिता.... तुम्हारा भाई.... अब इस दुनिया में नहीं है। वह शहीद हो गया।"

अपने पापा की बात सुनकर निकिता कुछ समय के लिए पत्थर सी हो गई। उसके पिता ने उसे संभाला। उससे कहा,

"अपने आपको संभालो। तुम एक बहादुर भाई की बहन हो। तुम्हें अपनी मम्मी को संभालना है। अपने बेटे के शहीद हो जाने से वह बहुत दुखी है।"

निकिता ने एक बहादुर बहन की तरह अपने दुख पर काबू कर अपनी मां को संभाला। 

रणवीर का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ आया। तिरंगे के केसरिया सफेद हरे और चक्र के नीले रंग के साथ निकिता को एक पांचवा रंग भी दिखाई पड़ा। उसके भाई के खून का लाल रंग। यह लाल रंग उसके भाई के शौर्य का प्रतीक था। यह रंग इस बात का आश्वासन था कि जब तक उसके भाई जैसे वीर इस देश में हैं इस देश का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

निकिता अपने कमरे में गई। जो राखी उसने रणवीर के लिए रखी थी उसे लाकर अपने भाई के ताबूत में रख दिया।


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