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Ritu Agrawal

Romance Tragedy

4.0  

Ritu Agrawal

Romance Tragedy

तेरी मेरी कहानी

तेरी मेरी कहानी

5 mins
244


प्रिया और मोहन एक ही मोहल्ले में रहते थे। दोनों के आर्थिक और सामाजिक स्तर में जमीन आसमान का अंतर था पर हमउम्र होने के कारण उनमें गहरी दोस्ती थी। दोनों एक दूसरे के संग यही गाते "ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे, तोड़ेंगे दम मगर तेरा साथ न छोड़ेंगे।"

प्रिया शहर के सबसे अच्छे और महंगे स्कूल में पढ़ती थी जबकि मोहन पास के ही एक सरकारी स्कूल में पढ़ता था। मोहन पढ़ने में बहुत मेधावी था।


धीरे-धीरे मोहन के मन में प्रिया के लिए प्यार पनपने लगा पर दोनों की परिस्थितियों में जमीन आसमान का अंतर देख मोहन गा उठता, " तू चांद नगर की शहजादी, मैं इस धरती का बंजारा।"

जबकि प्रिया, मोहन को अपना सबसे अच्छा दोस्त ही मानती थी और हमेशा कहती, "तेरा मुझसे है पहले का नाता कोई, यूं ही नहीं दिल लुभाता कोई।"

मोहन को दूसरे शहर के अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला मिल गया और प्रिया इसी शहर से अपना बी. ए .पूरा करने लगी।

मोहन, प्रिया को खत ज़रूर लिखता और हर बार यही लिखता," याद आ रही है, तेरी याद आ रही है। याद आने से तेरे जाने से जान जा रही है ।"


प्रिया भी कभी-कभी खत लिखती पर वो तो मोहन को अपना अच्छा दोस्त ही मानती थी। अब उसके और भी कई दोस्त थे, वह अपनी दुनिया में खुश थी और गाती रहती, "जिंदगी हँस कर बिताएंगे, हाले दिल गा के सुनाएंगे, हम तो सात रंग हैं ये जहान रंगी बनाएंगे।"

एक दिन प्रिया के पापा ने कहा कि कल तुम्हें देखने लड़के वाले आ रहे हैं। प्रिया की छोटी बहन उसे चिढ़ाते हुए बोली, "सुन सुन सुन दीदी तेरे लिए एक रिश्ता आया है, सुन सुन सुन दीदी"...

अगले दिन एक बहुत बड़े व्यापारी गुप्ता जी अपने बेटे के साथ प्रिया को देखने आए। प्रिया को देखते ही विवेक का मन गा उठा," तू तू है वही, दिल ने जिसे अपना कहा, तू है जहां मैं हूं वहीं अब तो यूं जीना तेरे बिन है सजा।"


विवेक से मिल प्रिया भी चहक उठी," तू मेरा जानू है तू मेरा दिलबर है। मेरी प्रेम कहानी का तू हीरो है।"

दोनों की शादी पक्की हो गई। यह सुनकर मोहन दुखी हो गया और उसका दिल रो पड़ा, "तू प्यार है किसी और का तुझे चाहता कोई और है। तू पसंद है किसी और की तुझे मांगता कोई और है।"

अगले महीने ही प्रिया और विवेक की शादी बहुत धूमधाम से हो गई। प्रिया झूमकर गा उठी, "तारे हैं बाराती ,चांदनी है ये बारात, सातों फेरे होंगे अब हाथों में लेकर हाथ।"


प्रिया अपनी गृहस्थी में खुश थी। जब वह अपनी शादी के बाद पहली बार मोहन से मिली तो अपनी शादी में न आने पर खूब लड़ी। मोहन फीकी हँसी हँसकर बोला, "तुमको खुश देखकर मैं बहुत खुश हुआ। ये आँख भर आई तो क्या हुआ, तो क्या हुआ?"


समय गुजरा। मोहन को मुंबई में अच्छी नौकरी मिल गई पर वह प्रिया को भूलकर शादी करने के लिए तैयार न था। जब प्रिया फोन पर उसे शादी करने को कहती तो वह गाता, "तुम मुझे भूल भी जाओ तो यह हक है तुमको, मेरी बात और है मैंने तो मोहब्बत की है।"

एक दिन एक भयानक कार दुर्घटना में विवेक की मृत्यु हो गई। प्रिया की हालत पागलों जैसी हो गई। वह दिन रात रोते हुए यही गाती, "चिट्ठी ना कोई संदेस, न जाने कौन सा देस जहां तुम चले गए।"

मोहन , प्रिया से मिलने आया। उसके गले लगकर प्रिया फूट फूट कर रोई। मोहन उसे समझाते हुए बोला, "ज़िंदगी के सफ़र में गुजर जाते हैं जो मुकाम, वो फिर नहीं आते, वो फिर नहीं आते।"

समय सबसे बड़ा मरहम है जो हर घाव भर देता है। प्रिया भी सदमे से बाहर आने लगी थी। फिर भी कभी कभी अकेले में रोते हुए गाती," दिल के अरमां आँसुओं में बह गए, हम वफ़ा करके भी तनहा रह गए।"


विवेक को गए दो साल हो चुके थे। प्रिया भी अपने आप को संभाल चुकी थी। प्रिया के पिता ने अब उसे दूसरी शादी करने को कहा। प्रिया बोली, "मैं विवेक की यादों के सहारे जिंदगी निकाल लूंगी। प्रिया गा उठी, "मैं जहां रहूं, मैं कहीं भी हूं, तेरी याद साथ है। किसी से कहूं कि नहीं भी कहूं, ये जो दिल की बात है।"

प्रिया के माता पिता ने उसे समझाया कि उसकी पूरी जिंदगी पड़ी है। वो लोग तो आज हैं कल नहीं हैं फिर प्रिया अकेली रह जाएगी। बहुत समझाइश के बाद प्रिया दूसरी शादी के लिए राजी हुई।


उसके पिता ने मोहन के सामने प्रिया से शादी का प्रस्ताव रखा क्योंकि वे देख चुके थे कि मोहन प्रिया को सच्चे दिल से चाहता है। मोहन का दिल गा उठा, "आए हो मेरी जिंदगी में तुम बहार बन के मेरे दिल में यूं ही रहना तुम प्यार प्यार बन के।"

जब प्रिया ने मोहन से पूछा कि वह यह शादी सिर्फ इसलिए तो नहीं कर रहा कि प्रिया की जिंदगी संवारना चाहता है तो मोहन ने प्रिया का हाथ अपने हाथों में लेकर कहा, "एहसान तेरा होगा मुझ पर दिल चाहता है वह कहने दो मुझे तुमसे मोहब्बत हो गई है मुझे पलकों की छांव में रहने दो।"


एक सादे समारोह में प्रिया और मोहन की शादी हो गई और अब प्रिया भी मोहन के रंग में रंग के गाने लगी थी, "तुझ में रब दिखता है यारा मैं क्या करूं ?सजदे सर झुकता है यारा मैं क्या करूं?"

फिर दोनों के आंगन में एक प्यारी सी बिटिया का जन्म हुआ मोहन और प्रिया गा उठे, "मेरे घर आई एक नन्ही परी चांदनी के हसीन रथ पर सवार। मेरे घर आई एक नन्ही परी" और उनकी जिंदगी खुशहाल और परिवार पूरा हो गया।

अब प्रिया और मोहन की जिंदगी में सिर्फ एक ही गाना था," हंसते हंसते कट जाए रस्ते। जिंदगी यूं ही चलती रहे। खुशी मिले या गम बदलेंगे ना हम दुनिया चाहे बदलती रहे।"



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