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Rajeshwar Mandal

Romance

3  

Rajeshwar Mandal

Romance

स्वघोषित सेलिब्रिटी

स्वघोषित सेलिब्रिटी

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बचपना गांव में बीता। गांव से भी एक डिग्री आगे ठेठ देहात कहिये तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
हालांकि आज का गांव शहरी कल्चर के लगभग बराबर है। 
थोड़ा बहुत अंतर है तो सिर्फ कैश के मामले में। वरना जींस, टी-शर्ट,  एंड्रॉयड फोन,चाट, चिकेन , नान तंदूरी वगैरह वगैरह सब जगह मिलता है अब।
लेकिन मेरे टाइम का गांव कुछ ज्यादा ही गांव था। मसलन संस्कार रहन सहन और लोक लज्जा के मामले में।

 
किशोरवय हो और मन में तरंगें न उठे ये हो नहीं सकता। 
भले ही बाप दादा के डर से उमंगों की तरंग पर पानी फेर जाए वो अलग बात है।
एक उपाय था कुछ उछल कूद करने का तो वो था सरकारी हाई स्कूल। परंतु वहां भी मास्टर साहब के हाथ में खजूर की छड़ी देखकर रुह अंदर तक कांप जाती थी।
बदतमीजी तो दूर की बात ,तमीज में रहने पर भी कमीज कई बार खजूर छड़ी से फट चुका है।

फिर भी उसमें कोई दिक्कत नहीं थी। दिक्कत थी उसी के सामने बेतरतीब तरीके से जलील हो जाना  जिसके लिए दिलों में तरंगें उफान मार रही हो। 
इतना होने के बाद फिर गुंजाइश कहां बचती थी इश्क मुहब्बत की बात करने की।

दीवानगी में थोड़ा थोड़ा अंश होता है आवारगी का और आवारगी में थोड़ा थोड़ा अंश होता है पागलपन का।
मतलब साफ है लहजे में रहकर इश्क मुहब्बत की बात नहीं की जा सकती है।

 

मेरी यह तस्वीर पिछले क्रिसमस अवकाश टूर की है।
गये थे अयोध्या बनारस घूमने। ज़माने से बेफिक्र घूम रहे थे कि इसी बीच एक गोरी मेम अचानक सामने प्रकट हूई। 
अंग्रेजी में बोली " आर यू राजेश्वर मंडल फ्राम बिहार"। हम बोले यस। फिर पूछ बैठी  "आर यू राइटर "। हम फिर बोले नो, बट राइट्स समटाइम्स। 
पहले मुस्कुराई फिर बोली- यीsss... डू नॉट ट्राइ टू मिसगाइड मी मिस्टर मंडल। आइ नो, यू आर नाॅट सीजनल बट रेगूलर राइटर। ओनली आइ हैभ नाॅट हर्ड बट आलसो रेड इन मेनी मैगजीन्स एंड आॅन सोशल साइट्स  आबाॅट यू सर ।

बात को विराम देना था सो हम ही पूछ बैठे। खैर जो भी हो आपको काम क्या है हमसे सो न बोलिये।
ऐसे मन ही मन हम भी बात जारी ही रखना चाहते थे।

कहते है - जंगल में घूम रही शकुंतला के पैरों में जब कांटा चुभा तो पैर को उठा कांटा निकालते वक्त दुष्यंत के तरफ़ उनकी एक नज़र पड़ी थी।  दुष्यंत यह समझ बैठे की शकुंतला उन्हें देखने के लिए ही पीछे मूडी हैं । पर बात ऐसी नहीं थी। लेकिन पल भर के इस भ्रम ने कालीदास की रचना को कालजयी और अमर प्रेम कथा बना डाला । 
यहां मेरी स्थिति भी दुष्यंत जैसी ही थी। फर्क बस इतना है कि दुष्यंत शंकुतला कथा कालीदास ने अभिज्ञानशाकुन्तलम में लिखा और हम अपनी कथा खुद ही लिख रहे है।

खैर अब काम की बात। गोरी मेम बोली यू आर सेलीब्रिटी सो हम एक सेल्फी लेना चाहते हैं आपके साथ। हम बोले ना ना बिल्कुल नहीं। हम ठहरे गांव के गवार आदमी। बात का बतंगड़ हो गया तो सब गड़बड़ हो जायेगा।
ना -नूकर करते करते एक बात पर सहमति बनी कि हम दोनों अलग-अलग फोटो खिंचायेंगे मगर सेम पोज में। यह यही फोटो है सेम पोज वाली परंतु अलग-अलग। एप के माध्यम से एक साथ मिलाया गया है। अब ए आइ के जमाने में लोग फोटो एडिट कर दे तो अलग बात है।
वो गोरी मेम फोटो एडिट करें इससे पहले ही मैंने इसे डिक्लेयर कर दिया।
                     


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