Shalini Dikshit

Romance


5.0  

Shalini Dikshit

Romance


सुनो स्वीटी

सुनो स्वीटी

3 mins 201 3 mins 201

"सुनो स्वीटी! एक बार फिर से अपने बाल बॉय कट करवा लो न प्लीज।" आकाश ने बहुत ही प्यार भरे अंदाज में कहा। 

"अरे यह क्या कह रहे हो? अब शादी के तीस वर्ष बाद फिर से बॉय कट। स्वीटी नाम से बुला रहे हो मुझे, हो क्या गया है तुम्हे? अरे अब तो हमारी बहू का भी नाम स्वीटी है। ये नाम तो गुजरे ज़माने की बात हो गई है, पहले-पहले तो तुम इसी नाम से बुलाते थे; बाद में तो तुम ने कभी इस नाम से नही पुकारा था। अब बच्चे क्या कहेंगे अगर अब बाल कट कराए तो।" प्रिया चिंता के साथ बोली। 

"सोचने दो बच्चो को क्या फर्क पड़ता है।" आकाश ने फिर हंस कर कहा। 

"तुम्हारे ही कहने से दसवीं क्लास के बाद से बाल बढ़ाने चालू किये थे तुम को पसंद नही थे, आज फिर से क्यों छोटे करने को कह रहे।" प्रिया ने भी सवाल दाग दिया। 

 प्रिया अपने आकाश के मुख से यह सुन के अचरज में पड़ गई थी तभी एक सांस में इतना सब बोल गई।

"अरे-अरे सांस तो ले लो कितना बोलती हो।" आकाश मुस्कराते हुए बोला, "आज भी बिना बहस कोई बात नही मानती हो मेरी। पसंद थे तब भी तुम्हारे कटे हुए बाल वह तो मैं देखना चाहता था कि तुम थोड़ा बड़े बालों में कितनी अच्छी लगती हो तभी तो बाल बढ़ाने को कहा था न यार। देखो अब हम दोनों ही है घर मे, बच्चे तो छुट्टियों में ही आते तो क्यों न अपनी बूढ़ी लेकिन खूबसूरत प्रिया के साथ शुरुआती दिनों को फिर से जियूँ।"

यह सब सुन के प्रिया पुराने दिनों में खो गई।

वह दसवीं में थी और आकाश चार वर्ष बड़े थे। आकाश की छवि पूरे मोहल्ले में बहुत ही समझदार और पढ़ने वाले लड़के की थी। आकाश ने प्रेम का प्रस्ताव रखा तो प्रिया को एक सपने जैसा ही लगा उसकी खुशी का ठिकाना ही नही रहा वह झट से मान गई। दो वर्ष ही साथ रह पाये फिर आकाश आगे की पढ़ाई और बाद में नौकरी के कारण बाहर चले गए।

साल में एक या दो बार आते कुछ दिनों के लिए, तब मिलना भी बहुत मुश्किल होता। काश मोबाइल का जमाना होता तब कितनी आसानी रहती।

प्रपोज करने के कुछ दिनों बाद मौका पाते ही आकाश ने बड़े प्यार से गले लगाते हुए चुपके से कान में कहा था, "अब बाल मत कटवाना और लड़कियों जैसे रहा करो क्या हर समय पैंट ही पहनती हो, कितनी सुंदर हो तुम; तुमको पता नही है।"

उस दिन क्या क्या महसूस हुआ था वह बता नही सकती रोम रोम खिल गया था यह सब सुन कर।

"सुनो प्रिया! परसों हमें गोआ जाना है तुम पैकिंग कर लेना उसी होटल में बुकिंग है जहाँ हनीमून में थी।" 

इतना कह के आकाश जल्दी से निकल गए बाहर शायद उनको भी शर्म सी आ रही थी।

अच्छा जी एक के बाद एक सरप्राइज अब मैं दिखाउंगी इनको, वह मन ही मन सोच रही थी वही पिंक नेलपॉलिश लगा के वैसी ही जाली दार शॉल ओढ़ के उसी पेड़ के नीचे ले जायेगी। यह सब सोच कर ही चेहरे पर मुस्कान छा गई और प्रिया बाल कटवाने चल पड़ी।


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