सुखाश्रम
सुखाश्रम
एक दिन संध्या को सुधा मंदिर जा रही थी। अचानक राधा रानी को देख कर बोली " अरे भाभी आप कहाँ गई थी, बहुत दिनों से मंदिर में दिखाई नहीं दी। आज भी भजन हैं, चलिए।"
"अरे क्या बताऊँ बहन जी? मैं यहाँ थी नहीं , आजकल मैं अपनी सहेलियों के संग रहती हूं।"
सहेलियों के साथ , मतलब मैं समझी नहीं भाभी
हाँ, बहन जी जहाँ में रहती हूँ वहाँ 70 महिलाएं हैं। बड़ा अच्छा लगता है ।समय से चाय -नाश्ता ,खाना और बातचीत भी करते हैँ।सब आराम से रहते हैं।
मतलब भाभी आजकल तुम अपने घर नहीं रहती हो।
अरे बहन जी काहे का घर। जितना पैसा था हमने सब बेटे को दे दिया। एक ही तो बेटा है, उसने बड़े खुश होकर मकान बनवाया ।एक कमरा मेरे लिए बनवाया जिसमें पूजा घर भी है ।
पर घर तो तुम्हारा है भाभी फिर क्यों ऐसा बोल रही हो ?
हाँ बहन जी, जब तक बेटे की शादी नहीं हुई थी तब तक घर मेरा था और बहू के आते ही मेरा घर पराया हो गया है ।बहू ने आते ही कह दिया है कि किचन में तुम्हें आने की अब कोई जरूरत नहीं है , मैं कमरे में ही खाना भेज दिया करूंगी । खाना खाओ और भजन करो ।अगर मैं जरा सा किचन में पहुँच जाती तो एकदम पूछती यहाँ क्या कर रही हो, यहाँ तुम्हारा क्या काम है, तुमसे भगवान का भजन भी नहीं होता है। जो भी चीज चाहिए मुझे बताओ। जरा- जरा सी बात की बेटे से शिकायत कर देती, अड़ोस पड़ोस में जाती तो वहाँ भी मेरा आना- जाना बन्द करवा दिया। एक दिन मैं अपनी बेटी के यहाँ गई। शाम को मैं वहाँ घूम रही थी। घूमते- घूमते मैंने देखा कि वहाँ एक गार्डन में बहुत ही स्त्रियाँ बातें कर रही थीं, मैं वहाँ पहुँच गई और मैंने उन लोगों से बातचीत की । मैंनें घर पहुँचकर बेटी से कहा वहाँ कितना अच्छा लगता है ? घर से भी अच्छा लगता है।
खाओ- पिओ, भगवान का भजन करो और आराम से रहो ।
बेटी ने बेटे से कहा" भैया माँ को यहाँ रख दो कम से कम खुश तो रहेंगी"।
अच्छा तो आजकल आप वृद्ध आश्रम में रहती हैं ।
हाँ बहनजी ,आजकल वहीं आराम से रहती हूँ। बेटी का घर पास ही है , वह तीसरे -चौथे दिन मिलने आ जाती है ।
तो भाभी यहाँ अभी कैसे आई हो ?
वहाँ हर हफ्ते डॉक्टर सभी का चेकअप करते हैं ।उन्होंने मेरा भी चैकअप किया तो उन्होंने मोतियाबिंद बताया। वहाँ के ऑफिस वालों ने बेटे को फोन किया तो बेटे ने मुझे यहाँ बुला कर आँखों का ऑपरेशन करवाया ।अब दो-तीन दिन बाद मैं वापस वहाँ चली जाऊँगी। चलिए भाभी यह तो अच्छी बात है कि आप वहाँ खुश हैं
हाँ , टाइम से सुबह 7 बजे चाय 9,बजे नाश्ता फिर उसके बाद भजन होते हैं। दोपहर12.30 बजे खाना फिर 4.00 बजे चाय बिस्कुट ,शाम को मंदिर में भजन और रात 8.30 बजे खाना और हमें क्या चाहिए बहनजी ? यहाँ तो मैं किसी से बात ही नहीं कर पाती थी ।जरा किसी से हँस बोल लेती तो उसकी चुगली भी बहू बेटे से कर देती ,फिर बेटा डाँटता तो मैं अकेले में रोती थी। अपना दुखड़ा किससे कहती? अब कम से कम वहाँ चैन से खाती हूँ और भगवान का भजन करती हूँ। मुझे तो वृद्ध आश्रम बड़ा ही अच्छा सुख आश्रम सा लगता है। कभी आकर देखो ।
हाँ भाभी आपसे मिलने अवश्य आऊँगी और वहाँ अकेली नहीं अपनी सहेलियों के साथ आऊँगी आपके सुखाश्रम में। पता देना भाभी।
हाँ बहनजी, पता कल दे दूँगी पर आप सुखाश्रम जरूर आना।
